अगस्त और सितंबर के दौरान बारिश सामान्य रहने की संभावना, अच्छी फसल पैदावार की उम्मीदें बढ़ीं

अगस्त और सितंबर के दौरान बारिश सामान्य रहने की संभावना, अच्छी फसल पैदावार की उम्मीदें बढ़ीं

भारत के मौसम विभाग ने सोमवार को कहा कि भारत में अगस्त और सितंबर में औसत मात्रा में बारिश होने की संभावना है। इससे एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अच्छी फसल पैदावार की उम्मीदें बढ़ रही हैं, जो कि विशाल कृषि क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर करती है।

क्या कहना है मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का

राज्य द्वारा संचालित भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अधिकांश मापदंडों के अनुसार, हम इस साल अगस्त और सितंबर में मानसून की बारिश सामान्य रहने की उम्मीद करते हैं।' महापात्र ने कहा कि उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है।

साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जून में शुरू होने वाले चार महीने के मौसम के लिए औसत, या सामान्य, वर्षा को 50 साल के औसत 88 सेमी (34 इंच) के 96% और 104% के बीच परिभाषित करता है।


फसलों पर बारिश का असर

राज्य के मौसम कार्यालय ने औसत बारिश होने की संभावना के साथ एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अच्छी फसल पैदावार की उम्मीदें बढ़ रही हैं, भारी या तेज बारिश की औसत संभावना से फसलों पर इसका खासा प्रभाव पड़ेगा। खेती के लिहाज से औसतन बारिश का लंबे समय तक होना अच्छी बात है। क्योंकि इससे किसानों की फसलों को कोई खतरा नहीं होगा। अगस्त व सितंबर की औसतन बारिश से फसलों की अच्छी उपज होगी।

 
भारत में मानसून आने के साथ-साथ खरीफ की फसलों की बुवाई भी शुरू हो जाती है। जो पूर्ण रूप से मानसून पर निर्भर करती है। अगस्त और सितंबर में सामान्य बारिश का होना खरीफ उत्पादन के लिए बेहतर साबित हो सकती है। मौसम विभाग का यह अनुमान किसानों और फसलों के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है। जो यकिनन उच्च फसल पैदावार की उम्मीदें बढ़ाएगा। 


कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग (EUA) की मंजूरी जल्द ही मिलने  की उम्मीद है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा भारती प्रवीण पवार ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि उम्मीद है कि डब्लूएचओ जल्द ही कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देगा। इससे पहले खबर सामने आी थी कि भारत के इस टीके को 5 अक्टूबर तक आपात उपयोग के लिए डब्लूएचओ से मंजूरी मिलने की संभावना है।

वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक वैक्सीन की सुरक्षा और क्लीनिकल ट्रायल का ​​​​डेटा और जोखिम प्रबंधन योजनाओं और अन्य कार्यान्वयन विचारों पर एक प्रजेंनटेशन देगी। कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसने आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए कोवैक्सीन से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को सौंप दिया है और वैश्विक उससे प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।


कोवैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में 77.8 प्रतिशत की प्रभावी पाया गया था। इसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट की ऑफ वायरोलाजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया था। भारत बायोटेक ने कहा था कि आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए ट्रायल से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी स्पष्टीकरणों का जवाब भी दे दिया गया है।

कोवैक्सीन उन टीकों में शामिल है, जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा कोवीशील्ड नाम से विकसित आक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन और रुस की वैक्सीन स्पुतनिक v का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। डब्लूएचओ ने अब तक फाइजर/बायोएनटेक,आक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनेका, जानसन एंड जानसन, माडर्ना और सिनोफार्म द्वारा निर्मित कोविड -19 के टीकों को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है।