बढ़ते संक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार अलर्ट, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर RT- PCR परीक्षण की तैयारी

बढ़ते संक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार अलर्ट, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर RT- PCR परीक्षण की तैयारी

बढ़ते संक्रमण को ध्यान में रखते हुए अब छत्तसीगढ़ सरकार भी अलर्ट होने के साथ सख्ती अपना रही है। ताजा खबर के मुताबिक, अब भूपेश बघेल सरकार ने राज्य में सभी हवाई अड्डो और रेलवे स्टेशनों पर आरटी-पीसीआर परीक्षण शुरू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने बढ़ते कोरोना मामलों के मद्देनजर हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर आरटी-पीसीआर परीक्षण शुरू करेगी। एक बैठक के दौरान शुक्रवार को इसकी जानकारी दी है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न मीडिया हाउस के संपादकों के साथ एक आभासी बैठक की और कोविड-19 की रोकथाम के बारे में सुझाव मांगे, और आर्थिक गतिविधियों के संचालन को लेकर जानकारी दी।

बघेल ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टीकाकरण की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने बताया कि कोविड़ -19 परीक्षण की दरों को ठीक करने और निजी अस्पतालों में कोरोना पॉजिटिव रोगियों के इलाज के लिए जल्द ही एक पहल की जाएगी। एक बैठक के दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन 10 लाख आबादी पर 1,435 परीक्षण किए जा रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 929 परीक्षण प्रति 10 लाख जनसंख्या प्रति दिन है।


रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2020 में आरटी-पीसीआर परीक्षणों का 26 फीसद था, जो अप्रैल 2021 में बढ़कर 40 फीसद हो गया है। राज्य सरकार द्वारा कुल 36 विशेष कोविड़ अस्पतालों और 66 कोविड़ देखभाल केंद्रों की स्थापना की गई है। वहीं 8 अप्रैल तक राज्य में लोगों को कुल 37,27,552 वैक्सीन खुराक प्रदान की गई है। टीकाकरण की पहली खुराक 87 फीसद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, फ्रंटलाइन श्रमिकों को 84 फीसद और 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 43  फीसद लोगों को दी गई है। 


दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के कहर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए केजरीवाल सरकार कोे जोरदार फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि राजधानी के मौजूदा चिकित्सा ढांचे की सारी पोल खुल गई है। महामारी कोरोना के दौर में यह पूरी तरह से गर्त में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोरोना से पीड़ित सभी नागरिकों को जरूरत के अनुसार उपचार मुहैया कराने का सख्त निर्देश दिया है।

ऐसे में जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार जब यह कहती है कि राज्य में चिकित्सा ढांचा ठीक है, तो वह उस शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपना सिर रेत में गड़ाए रहता है।

सरकार के पास हालात से निपटने का ढांचा नहीं
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा कि जब आप मौजूदा हालात का बचाव करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। हम हमेशा साफ-साफ बात करते हैं।

आगे कोर्ट ने 53 वर्षीय मरीज को आईसीयू बेड दिलाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। यह अदालत याचिकाकर्ता की तरह लोगाें को महज यह कह कर नहीं लौटा सकती कि राज्य के पास इस हालत से निपटने का ढांचा नहीं है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा, मौजूदा ढांचे के साथ हम कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट यह नहीं कह कसता कि ढांचा गर्त में है। ऑक्सीजन की कमी है, तो ढांचा क्या करेगा। जीवन रक्षक गैस के अभाव में अस्पतालों ने अपने बेड कम कर दिए थे। सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

लेकिन राहुल मेहरा की 15000 बेड और 1200 आईसीयू बेड पाइपलाइन में होने की दलील पर हाईकोर्ट एकदम से भड़क उठा। हाईकोर्ट ने कहा कि नहीं यह सही नहीं है। केवल ऑक्सीजन के कारण ऐसा नहीं है। यदि आपके पास ऑक्सीजन हो तो क्या उसके अलावा आपके पास सब कुछ है? पाइपलाइन पाइपलाइन है, अभी वो बेड वजूद में नहीं आए हैं।

आगे कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा ढांचा मुहैया कराना सरकार का दायित्व है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि शताब्दी में एक बार हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से काफी संपन्न देशों ने भी इतनी बड़ी आपदा में चिकित्सा ढांचे को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोरोना मरीजों को अस्पताल की जरूरत है।


जबकि उच्च न्यायालय ने दिल्ली में चिकित्सा उपकरणों की कालाबाजारी को लेकर तल्ख टिप्पणी करते कहा कि लोगों का नैतिक तानाबाना बहुत हद तक 'विखंडित' हो गया है, क्योंकि वे कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए एक साथ आने की बजाय ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं।

इस दौर में भी कालाबाजारी
साथ ही जस्टिस विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा हम अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, इसीलिए हम एक साथ नहीं आ रहे हैं। इसी कारण हम जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले देख रहे हैं।

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक वकील के उस सुझाव पर की, जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्त चिकित्सा पेशेवरों, मेडिकल छात्रों या नर्सिंग छात्रों की सेवाएं मौजूदा स्थिति में लेने को कहा था।

इस पर उन्होंने कहा कि इस समय केवल दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और बिस्तरों की ही नहीं बल्कि चिकित्सा कर्मियों की भी कमी है। वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तरह हो, जिससे कोर्ट की सहायता की जा सके।


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