PM मोदी ने विभागों में समन्वय न होने के नुकसान गिनाए, बोले- प्रगति पथ पर ले जाएगा 'PM GatiShakti'

PM मोदी ने विभागों में समन्वय न होने के नुकसान गिनाए, बोले- प्रगति पथ पर ले जाएगा 'PM GatiShakti'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के लिए एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान 'पीएम गतिशक्ति' का शुभारंभ किया। पीएम मोदी देश के बुनियादी ढांचे के परिदृश्य के परिवर्तन की दिशा में 100 लाख करोड़ की योजनाओं को हरी झंडी दिखाने के लिए प्रगति मैदान पहुंचे। यह रेल और सड़क सहित 16 मंत्रालयों को जोड़ने वाला डिजिटल प्लेटफार्म है जिसके जरिए लाखों करोड़ों की योजनाओं को पूरी रफ्तार से लागू करने में मदद मिलेगी। इस दौरान पीएम मोदी ने अपना संबोधन भी दिया। 

-मोदी आगे कहते हैं, 'देश के किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी तेजी से विस्तार दिया जा रहा है। 2014 में देश में सिर्फ 2 मेगा फूड पार्क्स थे। आज देश में 19 मेगा फूड पार्क्स काम कर रहे हैं। अब इनकी संख्या 40 से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य है।' 


-पीएम मोदी बोले, '2014 के पहले के 5 सालों में सिर्फ 60 पंचायतों को ही आप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा सका था। बीते 7 वर्षों में हमने डेढ़ लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को आप्टिकल फाइबर से कनेक्ट कर दिया है।'

-पीएम ने आगे कहा कि 2014 के पहले लगभग 250 किलोमीटर ट्रैक पर ही मेट्रो चल रही थी। आज 7 सौ किलोमीटर तक मेट्रो का विस्तार हो चुका है औऱ एक हजार किलोमीटर नए मेट्रो रूट पर काम चल रहा है।


-मोदी बोले, '2014 के पहले के 5 सालों में सिर्फ 1900 किलोमीटर रेल लाइनों का दोहरीकरण हुआ था। बीते 7 वर्षों में हमने 9 हजार किलोमीटर से ज्यादा रेल लाइनों की डबलिंग की है। 2014 से पहले के 5 सालों में सिर्फ 3000 किलोमीटर रेलवे का बिजलीकरण हुआ था। बीते 7 सालों में हमने 24 हजार किलोमीटर से भी अधिक रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया है।' 

-पीएम मोदी ने बताया, भारत में पहली इंटरस्टेट नैचुरल गैस पाइपलाइन साल 1987 में कमीशन हुई थी। इसके बाद साल 2014 तक, यानि 27 साल में देश में 15,000 कि.मी. नैचुरल गैस पाइपलाइन बनी। आज देशभर में 16,000 कि.मी. से ज्यादा गैस पाइपलाइन पर काम चल रहा है। ये काम अगले 5-6 वर्षों में पूरा होने का लक्ष्य है।


-पीएम गतिशक्ति कई दशकों से अधूरी रह गई जिम्मेदारियों और प्रगति को पूरा करने के लिए 16 मंत्रालयों को एक साथ लाती है: प्रधानमंत्री 

-पीएम मोदी ने कहा, 'पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान सरकारी प्रोसेस और उससे जुड़े अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को तो एक साथ लाता ही है, ये ट्रांसपोर्टेशन के अलग-अलग मोड्स को, आपस में जोड़ने में भी मदद करता है। ये होलिस्टिक गवर्नेंस का विस्तार है।' 


-हमारा मंत्र है 'प्रगति की इच्छा, प्रगति के लिए काम, प्रगति के लिए धन, प्रगति की योजना और प्रगति के लिए प्राथमिकता': पीएम 

-21वीं सदी के भारत के निर्माण के लिए पीएम गतिशक्ति भारत की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को नई ऊर्जा देगी: पीएम 

-पीएम गतिशक्ति भारत के किसानों, निर्माताओं, व्यापारियों के विकास पर केंद्रित है। यह बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी को फिर से परिभाषित करने में एक गेम-चेंजर साबित होगा: पीएम 


-पीएम बोले, 'हमारे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का विषय ज्यादातर राजनीतिक दलों की प्राथमिकता से दूर रहा है। ये उनके घोषणापत्र में भी नजर नहीं आता। अब तो ये स्थिति आ गई है कि कुछ राजनीतिक दल, देश के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर आलोचना करने लगे हैं।' 

-पीएम मोदी ने कहा, हमने ना सिर्फ परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने का वर्क-कल्चर विकसित किया बल्कि आज समय से पहले प्रोजेक्टस पूरे करने का प्रयास हो रहा है। 


-प्रधानमंत्री बोले, 'गतिशक्ति के इस महाअभियान के केंद्र में हैं भारत के लोग, भारत की इंडस्ट्री, भारत का व्यापार जगत, भारत के मैन्यूफैक्चरर्स, भारत के किसान। ये भारत की वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को 21वीं सदी के भारत के निर्माण के लिए नई ऊर्जा देगा, उनके रास्ते के अवरोध समाप्त करेगा।'

 पीएम मोदी बोले, 'आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ हम, अगले 25 वर्षों के भारत की बुनियाद रच रहे हैं। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान, भारत के इसी आत्मबल को, आत्मविश्वास को, आत्मनिर्भरता के संकल्प तक ले जाने वाला है। ये नेशनल मास्टरप्लान, 21वीं सदी के भारत को गतिशक्ति देगा।' 

-पीएम बोले, 'आज दुर्गाष्टमी है, पूरे देश में आज शक्ति स्वरूपा का पूजन हो रहा है। शक्ति की उपासना के इस पुण्य अवसर पर देश की प्रगति की गति को भी शक्ति देने का शुभ कार्य हो रहा है।' 

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के लिए 'पीएम गतिशक्ति' का शुभारंभ कर दिया है। 


प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, यह योजना समग्र योजना को संस्थागत रूप देकर विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के मुद्दे पर अहम भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी प्रगति मैदान में नए प्रदर्शनी परिसर (प्रदर्शनी हाल 2 से 5) का भी उद्घाटन करेंगे। पीएमओ ने कहा, भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ), भारत व्यापार संवर्धन संगठन का प्रमुख कार्यक्रम, इन नए प्रदर्शनी हाल में 14 से 27 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा।

इसे देश के बुनियादी ढांचे के परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक कार्यक्रम बताते हुए, पीएमओ ने मंगलवार को कहा कि गति शक्ति परियोजना विभागीय साइलो को तोड़ देगी और प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में हितधारकों के लिए समग्र योजना को संस्थागत रूप देगी।

पीएम मोदी ने मंगलवार को ट्वीट किया, 'महा अष्टमी के शुभ अवसर पर, कल, 13 अक्टूबर को सुबह 11 बजे, पीएम गतिशक्ति - मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान लान्च किया जाएगा।' 

यह पहल क्यों खास है?

 पीएमओ ने कहा कि गतिशक्ति व्यापकता, प्राथमिकता, अनुकूलन, तुल्यकालन और विश्लेषणात्मक और गतिशील होने के छह स्तंभों पर आधारित है। यह बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा, रसद लागत में कटौती करेगा, आपूर्ति श्रृंखला में सुधार करेगा और स्थानीय वस्तुओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना देगा। बता दें कि पीएम ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर इस 100 ट्रिलियन रुपये (1.35 ट्रिलियन डॉलर) की योजना की घोषणा की थी।

पीएम ने कहा था कि इसके जरिए रोजगार पैदा करने और देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वच्छ ईंधन के उपयोग का विस्तार करने में मदद हासिल होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, 'गति शक्ति नामक बुनियादी ढांचा कार्यक्रम से उद्योगों की उत्पादकता को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।'

 प्रधानमंत्री ने कहा, 'हम गति शक्ति के लिए एक मास्टरप्लान लॉन्च करेंगे, यह एक बड़ा कार्यक्रम है, जो कि सैकड़ों-हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा। यह योजना स्थानीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और भविष्य के आर्थिक विकास के नए रास्ते बनाने में मदद करेगी।'


भारत ने पाकिस्तानी NSA को दिया न्योता, अफगानिस्तान के मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक

भारत ने पाकिस्तानी NSA को दिया न्योता, अफगानिस्तान के मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक

अफगानिस्‍तान की स्थिति पर द‍िल्‍ली में अगले महीने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक होनी है। इसकी मेजबानी भारत करेगा। इस बैठक में कई अन्‍य देशों के साथ रूस और पाकिस्‍तान को भी न्‍योता दिया गया है। बैठक की अध्‍यक्षता भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल करेंगे। माना जाता है कि इस क्षेत्रीय सम्‍मेलन में चीन, इरान, तजाकिस्‍तान और उजबेकिस्‍तान को भी बुलाया गया है। इसमें अफगानिस्‍तान में मानवीय संकट के मसलों पर बातचीत होगी। साथ ही सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। 


प्रस्तावित वार्ता 10-11 नवंबर को हो सकती हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक यह सम्मेलन 2019 में ईरान में पहले आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के समान प्रारूप में होगा। एनएसए-स्तरीय बैठक में आमंत्रित लोगों में अफगानिस्तान के पड़ोसी देश- रूस, चीन, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। पता चला है कि उस आमंत्रण को पाकिस्तान के एनएसए मोईद युसूफ को भी दे दिया गया है, हालांकि सम्मेलन और आमंत्रण पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, पता चला है कि तैयारी चल रही है।


तालिबान से दुनिया को जैसी अपेक्षाएं हैं, उसके बारे भी अवगत कराया जाएगा। बताया जा रहा है कि जिन देशों के एनएसए को आमंत्रित किया गया है, उन्‍हें पहले ही भारत से निमंत्रण मिल चुका है। हालांकि, इस कॉन्‍फ्रेंस में तालिबान को न्‍योता नहीं दिया गया है। यह बैठक नवंबर के दूसरे हफ्ते में प्रस्‍तावित है।

रूस ने भी 20 अक्‍टूबर को मॉस्‍को में इसी तरह का सम्‍मेलन रखा है। इसमें भारत के साथ-साथ उसने तालिबान को भी बुलाया है। हालांकि, भारत सरकार तालिबान को यहां बुलाने को लेकर अभी असमंजस में है। कारण है कि तालिबान को अभी अंतरराष्‍ट्रीय बिरादरी की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। खासतौर से मानवाधिकार से जुड़े मसलों को लेकर अभी उससे कहीं ज्‍यादा अपेक्षा हैं। इनमें महिलाओं, बच्‍चों और अल्‍पसंख्‍यकों के मानवाधिकार शामिल हैं।


यह देखना दिलचस्‍प होगा कि पाकिस्‍तान कॉन्‍फ्रेंस में क्‍या भूमिका अदा करता है। देखने वाली बात तो यह भी होगी कि पाकिस्‍तानी एनएसए मोईद यूसुफ आते हैं कि नहीं। अगर ऐसा होता है तो 2016 में अमृतसर में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश सलाहकार सरताज अजीज के बाद दोनों ओर से यह किसी उच्‍चाधिकारी का पहला दौरा होगा। इस साल मई में भी भारत ने अफगानिस्‍तान पर कॉन्‍फ्रेंस का प्रस्‍ताव किया था। तब भी यूसुफ को न्‍योता दिया गया था। हालांकि, दिल्‍ली में कोरोना की दूसरी लहर के कारण यह बैठक नहीं हो पाई थी।