जुर्म के दौर में आज के समय में कोई भी नहीं सुरक्षित, फिर चाहे वह बच्चा हो या बड़ा जाने

जुर्म के दौर में आज के समय में कोई भी नहीं सुरक्षित, फिर चाहे वह बच्चा हो या बड़ा जाने

दिनों दिन बढ़ते जा रहे जुर्म के दौर में आज के समय में कोई भी सुरक्षित नहीं है फिर चाहे वह बच्चा हो या बड़ा वहीं हाल ही में हैदराबाद चिकित्सक बलात्कार केस के बाद अब राष्ट्रीय महिला आयोग ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से वर्ष 2012 में हुए निर्भया काण्ड के आरोपियों की दया याचिका को खारिज करने की गुहार लगाई है। 

जंहा आयोग ने बोला है कि यह दूसरों को युवा लड़कियों व स्त्रियों के विरूद्ध इस तरह के क्राइम करने से रोकेगा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने बयान में कहा, युवा लड़कियों व स्त्रियों के विरूद्ध अमानवीय त्रासदियों की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, ऐसे जघन्य अपराधों के दोषियों को सज़ा-ए-मौत दी जानी चाहिए क्योंकि वे किसी भी दया के लायक नहीं हैं।

वहीं जानकारी के लिए हम आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वह सरकार को आदेश दें कि इस तरह के जघन्य व क्रूर बलात्कार के मामलों में सभी अपीलों के परीक्षण व निपटारे के लिए एक निश्चित तंत्र व समय सीमा निर्धारित करें। वहीं यह समय सीमा छह महीने की तय की जा सकती है जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जा सके।