निकिता मर्डर केस: जानें कितने दिन चली कोर्ट में सुनवाई

निकिता मर्डर केस: जानें कितने दिन चली कोर्ट में सुनवाई

नई दिल्ली: निकिता तोमर मर्डर केस में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है और इस मामले में तीन आरोपी में से दो आरोपी तौसीफ और रेहान को दोषी करार दिया है। जिनकी सजा को लेकर कोर्ट 26 मार्च 2021 को सुनवाई करेंगी। 3 महीने 22 दिन से चल रहे इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ आइये जानते है।

क्या है पूरा मामला
यह मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ का है। जहां बी.कॉम ऑनर्स फाइनल ईयर की छात्रा निकिता तोमर 26 अक्टूबरस 2020 की सुबह अपने घर से निकली और कभी वापस लौटकर नहीं आई। जहां निकिता को बल्लभगढ़ में उसके कॉलेज के बाहर तौसीफ नाम के एक लड़के ने गोली मार कर उसकी हत्या कर दी। जिस समय से घटना हुई उस समय तौसीफ के साथ उसका साथी रेहान भी मौजूद था। पुलिस की जांच में सामने आया कि तौसीफ निकिता का अपहरण करने आया था, लेकिन जब वह ऐसा नहीं कर पाया, तो उसने निकिता के सिर में गोली मार दी और फरार हो गया। आनन-फानन में निकिता को अस्पताल ले जाया गया जहां इसकी मौत हो गई।

क्या-क्या हुआ इस केस में
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर इस केस की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरताज बासवाना की कोर्ट में शुरू हुई। 1 दिसंबर को पहली गवाही कराई गई। जिसमें निकिता के चचेरे भाई तरुण तोमर और सहेली निकिता शर्मा शामिल हुए। वहीं बचाव पक्ष की ओर 55 लोगों ने गवाही दी जिसमें परिवार के सदस्य, कॉलेज के प्रिंसिपल समेत कई पुलिसकर्मी शामिल हुए।

SIT को सौंपी गई जांच
सरकार ने इस मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी। जिसके बाद SIT की टीम ने मुख्य हत्यारोपी तौसीफ को सोहना से गिरफ्तार कर लिया। साथ ही रेहान और हथियार उपलब्ध कराने वाले अजरू को भी पुलिस ने पकड़ा। 11 दिन बाद सभी सबूत एकत्र करके 700 पेज की चार्जशीट तैयार हुई। चार्जशीट में निकिता की सहेली समेत कुल 60 गवाह बनाए गए थे। और यह चार्जशाट 6 नवंबर को कोर्ट में दाखिल कर दी गई।

दो आरोपी दोषी करार
24 मार्च को हुई इस मामले की सुनवाई में फरीदाबाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया जिनमें कोर्ट ने तौसीफ और रेहान को दोषी करार दिया। वहीं, अजरुद्दीन को बरी कर दिया गया है। बता दें कि तौसीफ को मुख्य आरोपी बनाया गया था, जबकि रेहान वारदात के वक्त उसके साथ मौजूद था। अजरुद्दीन पर हथियार देने का आरोप था, जो साबित नहीं हो पाया है।


दुनियाभर के 27 अमीर देशों में 25 गुना तेज टीकाकरण

दुनियाभर के 27 अमीर देशों में 25 गुना तेज टीकाकरण

धरती के अधिकांश संसाधनों पर कब्जा जमाने वाले दुनिया के अमीर देशों की हनक आपदा के समय में भी दिख रही है। कोविड-19 महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए वैक्सीन ही एकमात्र जीवन की किरण बनकर सामने आई है, लेकिन असमान वितरण ने महामारी से लड़ाई की चुनौती को कठिन बना दिया है।

अब तक दुनिया की पांच फीसद आबादी का टीकाकरण पूरा हो चुका है, लेकिन इस पांच फीसद आबादी में अमीर-गरीब की गहरी खाई नजर आ रही है। ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के अनुसार गुरुवार तक दुनिया को दी गई कुल वैक्सीन की खुराक में 40 फीसद हिस्सेदारी सिर्फ 27 अमीर देशों की है जिनकी वैश्विक आबादी में हिस्सेदारी महज 11 फीसद है। पेश है एक नजर:

वितरण की असमानता

ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के आंकड़े बताते हैं कि उच्च आय वाले इन देशों में कम आय वाले देशों के मुकाबले 25 गुना तेज टीकाकरण हो रहा है। कम धनी और दुनिया की आबादी में दूसरा 11 फीसद का हिस्सा रखने वाले देशों के हिस्से अभी तक सिर्फ 1.6 फीसद ही वैक्सीन आई है। ट्रैकर के अनुसार दुनिया के 154 देशों में 72.60 करोड़ वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है।


आबादी और टीकाकरण का अनुपात

ब्लूमबर्ग वैक्सीन ट्रैकर के अनुसार अगले तीन महीने में अमेरिका की 75 फीसद आबादी को टीके लगाए जाने का लक्ष्य है। विडंबना यह है कि दुनिया के करीब आधे देश अभी ऐसे हैं जहां की एक फीसद आबादी का भी टीकाकरण नहीं संपन्न हो पाया है। टीकाकरण में यह असमानता तब है जब दुनिया के 40 सबसे गरीब देशों के पास टीकाकरण का डाटा सार्वजनिक करने के लिए उपलब्ध ही नहीं है। इन देशों की वैश्विक आबादी में हिस्सेदारी आठ फीसद है।


अफ्रीका महाद्वीप में सबसे कम टीकाकरण

दुनिया का सबसे गरीब महाद्वीप अफ्रीका में टीकाकरण भी सबसे कम है। इसके 54 देशों में से सिर्फ तीन में एक फीसद से अधिक आबादी को टीके लगाए जा सके हैं। इनमें से 20 से ज्यादा देश ऐसे हैं जहां टीकाकरण का खाता ही नहीं खुला है।

क्या हो तरीका


अभी ऐसी कोई प्रणाली नहीं विकसित है जो दुनिया भर में वैक्सीन के समान वितरण को सुनिश्चित करा सके। यदि दुनिया की सभी वैक्सीन का वितरण आबादी के आधार पर किया जाए तो अपने वास्तविक हिस्से के मुकाबले अमेरिका छह गुना अधिक खुराक लगा लगाएगा। ब्रिटेन आबादी के अनुपात में सात गुना अधिक टीके का इस्तेमाल करेगा। इस आशय की सूची में संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल शीर्ष पर है जो अपनी आबादी के हिसाब से हिस्से के क्रमश: नौ और 12 गुने टीकाकरण करेंगे। चीन में टीकाकरण की रफ्तार दुनिया के औसत के करीब है। यहां दुनिया का 20 फीसद टीका दुनिया की 18 फीसद आबादी को लगाया जा रहा है।


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