नरेन्द्र मोदी सरकार अब माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए  करेंगे कानून में परिवर्तन

नरेन्द्र मोदी सरकार अब माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए  करेंगे कानून में परिवर्तन

बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए नरेन्द्र मोदी सरकार अब माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए बने कानून में परिवर्तन लाने जा रही है. नरेन्द्र मोदी सरकार ने माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों का रखरखाव व कल्याण अधिनियम, 2007 की परिभाषा को विस्तार करने का निर्णय किया है. 

सरकार द्वारा लाये जाने वाले नए कानून के तहत माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की जबाबदेही सिर्फ उनके जैविक बच्चों की नहीं बल्कि बेटे-बहू पोता-पोती व नाती-नातिन की भी होगी.

इस अमेंडमेंट को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मंजूरी दे दी है. अधिनियम में संशोधन माता-पिता व दादा-दादी व सास ससुर (चाहे वे वरिष्ठ नागरिक हो या न हो) को शामिल करने के लिए किया गया है. सूत्रों ने बोला कि बिल को अगले हफ्ते संसद में लाने की आसार है.

परिवार के बुजुर्गों को प्यार व सम्मान देने की बजाय उनका तिरस्कार करने व उनसे पीछा छुड़ाने का कोशिश करने वाली संतानों को अब तीन माह के बदले छह महीने तक की कारागार हो सकती है.

आवास, सिक्योरिटी व सुरक्षा को शामिल करने के लिए “रखरखाव” की परिभाषा का विस्तार करने का प्रस्ताव है. रखरखाव की मात्रा वरिष्ठ नागरिकों व माता-पिता, बच्चों व संबंधियों की कमाई व मानक के आधार पर तय की जा सकती है.