केरल सरकार ने की CAA के विरुद्ध याचिका दायर

केरल सरकार ने की CAA के विरुद्ध याचिका दायर

 केरल सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरूद्ध उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। केरल पहला ऐसा प्रदेश है, जिसने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। केरल सरकार ने CAA के विरूद्ध संविधान के आर्टिकल 131 के तहत सूट दाखिल किया है। याचिका में CAA को भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक बताया गया है।

 संविधान का आर्टिकल 131 हिंदुस्तान सरकार व किसी भी प्रदेश के बीच किसी भी टकराव में सर्वोच्च कोर्ट को मूल अधिकार क्षेत्र देता है।

इसके पहले केरल विधानसभा में दिसंबर में नागरिकता कानून के विरूद्ध प्रस्ताव पास हुआ था। इसमें केन्द्र से इस कानून को लागू नहीं करने की मांग की गई थी। इस प्रस्ताव को सीएम पिनराई विजयन ने पेश किया था। सिर्फ भाजपा विधायक ओ। राजगोपाल को छोड़ सभी विधायकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।

CAA के विरूद्ध विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बोला था, 'केरल में धर्मनिरपेक्षता, यूनानियों, रोमन, अरबों का एक लंबा इतिहास है, हर कोई हमारी धरती पर पहुंच गया। ईसाई व मुसलमान आरंभ में केरल पहुंचे। हमारी परंपरा समावेशी है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि केरल में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा। ' विधानसभा में कांग्रेस, सीपीआई (एम) ने पिनराई द्वारा पेश किये गए प्रस्ताव का समर्थन किया।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के विरूद्ध अब तक उच्चतम न्यायालय में 65 से अधिक याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। CAA के विरूद्ध देशभर में हो रहे प्रदर्शन के बाद उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मुद्दे की सुनवाई 22 जनवरी को होगी।



10 जनवरी को देशभर में लागू हुआ CAA
देशभर में ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शनों के बावजूद नागरिकता संशोधन क़ानून शुक्रवार से यानी 10 जनवरी से लागू हो गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना में बोला कि कानून दस जनवरी से प्रभावी होगा, जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी।
अधिसूचना में बोला गया है, 'नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (2019 का 47) की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्र सरकार 10 जनवरी 2020 को उक्त अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होने की तारीख के रूप में तय करती है। ' संशोधित नागरिकता कानून को 11 दिसंबर को संसद द्वारा पारित किया गया था।