स्वदेशी मिसाइल का अटैक: घर में घुस कर मारेगी पृथ्वी-2

स्वदेशी मिसाइल का अटैक: घर में घुस कर मारेगी पृथ्वी-2

चीन और पाकिस्तान के साथ जारी गतिरोध के बीच भारत लगातार अपनी सैन्य ताकतों को बढ़ाने का काम तेजी के साथ कर रहा है। इसी कड़ी में डीआरडीओ की ओर से लगातार विकसित हो रहीं मिसाइलों का परीक्षण जारी है। आज ओडिशा के बालासोर के तट से दो पृथ्वी-2 बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया। वहीं इसके पहले इसी महीने भारतीय वायुसेना ने 10 आकाश मिसाइलों का सफल परीक्षण किया था।

बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-2 का सफल परीक्षण
दरअसल, बालासोर में ओडिशा तट से बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-2 का आज परीक्षण किया गया। बताया जा रहा है कि पृथ्वी 2 का परीक्षण सफल रहा। जानकारी के मुताबिक, पृथ्वी-2 मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की तरफ से स्वदेशी तौर पर तैयार किया गया है।

पृथ्वी 2 मिसाइल की खासियत:
बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-2 सतह से सतह पर मार करने में सक्षम है। पृथ्वी-2 500 से 1,000 किलोग्राम भार तक के हथियारों को लेकर जा सकती है। वहीं ये मिसाइल सतह से सतह पर साढ़े तीन सौ किलोमीटर मार कर सकती है। मिसाइल में तरल ईंधन वाले दो इंजन लगाए गए हैं। हालांकि इसे तरल और ठोस दोनों तरह क ईंधन से संचालित किया जाता है।

पृथ्वी-2 का यह दूसरा मिसाइल परीक्षण है। 20 नवंबर को भी ओडिशा तट से रात के वक्त पृथ्वी 2 मिसाइल का परीक्षण किया गया था। 350 किलोमीटर रेंज की मारक क्षमता वाले मिसाइल का नाइट ट्रायल लाउंच कॉम्पैक्स-3 से मोबाइल लाउंचर से शाम 7 बजे से लेकर 7. 15 बजे के बीच किया गया था।

10 आकाश मिसाइलों का परीक्षण हुआ
गौरतलब है कि इसके पहले भारतीय वायुसेना ने 10 आकाश मिसाइलों का परीक्षण भी किया था, जो सफल रहा। आकाश मिसाइल को भी डीआरडीओ ने ही विकसित किया है। ये मिसाइल मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने में सक्षम है। इस मिसाइल का निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा मिलकर किया गया है। ये सभी मिसाइलें लक्ष्य को भेद पाने में सफल रही हैं।


दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के कहर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए केजरीवाल सरकार कोे जोरदार फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि राजधानी के मौजूदा चिकित्सा ढांचे की सारी पोल खुल गई है। महामारी कोरोना के दौर में यह पूरी तरह से गर्त में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोरोना से पीड़ित सभी नागरिकों को जरूरत के अनुसार उपचार मुहैया कराने का सख्त निर्देश दिया है।

ऐसे में जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार जब यह कहती है कि राज्य में चिकित्सा ढांचा ठीक है, तो वह उस शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपना सिर रेत में गड़ाए रहता है।

सरकार के पास हालात से निपटने का ढांचा नहीं
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा कि जब आप मौजूदा हालात का बचाव करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। हम हमेशा साफ-साफ बात करते हैं।

आगे कोर्ट ने 53 वर्षीय मरीज को आईसीयू बेड दिलाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। यह अदालत याचिकाकर्ता की तरह लोगाें को महज यह कह कर नहीं लौटा सकती कि राज्य के पास इस हालत से निपटने का ढांचा नहीं है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा, मौजूदा ढांचे के साथ हम कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट यह नहीं कह कसता कि ढांचा गर्त में है। ऑक्सीजन की कमी है, तो ढांचा क्या करेगा। जीवन रक्षक गैस के अभाव में अस्पतालों ने अपने बेड कम कर दिए थे। सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

लेकिन राहुल मेहरा की 15000 बेड और 1200 आईसीयू बेड पाइपलाइन में होने की दलील पर हाईकोर्ट एकदम से भड़क उठा। हाईकोर्ट ने कहा कि नहीं यह सही नहीं है। केवल ऑक्सीजन के कारण ऐसा नहीं है। यदि आपके पास ऑक्सीजन हो तो क्या उसके अलावा आपके पास सब कुछ है? पाइपलाइन पाइपलाइन है, अभी वो बेड वजूद में नहीं आए हैं।

आगे कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा ढांचा मुहैया कराना सरकार का दायित्व है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि शताब्दी में एक बार हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से काफी संपन्न देशों ने भी इतनी बड़ी आपदा में चिकित्सा ढांचे को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोरोना मरीजों को अस्पताल की जरूरत है।


जबकि उच्च न्यायालय ने दिल्ली में चिकित्सा उपकरणों की कालाबाजारी को लेकर तल्ख टिप्पणी करते कहा कि लोगों का नैतिक तानाबाना बहुत हद तक 'विखंडित' हो गया है, क्योंकि वे कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए एक साथ आने की बजाय ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं।

इस दौर में भी कालाबाजारी
साथ ही जस्टिस विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा हम अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, इसीलिए हम एक साथ नहीं आ रहे हैं। इसी कारण हम जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले देख रहे हैं।

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक वकील के उस सुझाव पर की, जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्त चिकित्सा पेशेवरों, मेडिकल छात्रों या नर्सिंग छात्रों की सेवाएं मौजूदा स्थिति में लेने को कहा था।

इस पर उन्होंने कहा कि इस समय केवल दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और बिस्तरों की ही नहीं बल्कि चिकित्सा कर्मियों की भी कमी है। वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तरह हो, जिससे कोर्ट की सहायता की जा सके।


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