भारत की कोरोना वैक्सीन कोवैक्‍सीन डेल्टा प्लस वेरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी

भारत की कोरोना वैक्सीन कोवैक्‍सीन डेल्टा प्लस वेरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी

देश में कोरोना वायरस के डेल्‍टा प्‍लस वेरिएंट के बढ़ते मामलों के बीच एक राहत की खबर है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने अपने अध्ययन में दावा किया है कि कोरोना की भारतीय वैक्सीन 'कोवैक्‍सीन' डेल्‍टा प्‍लस वेरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी है। न्‍यूज एजेंसी एएनआइ के हवाले से यह खबर आई है।

बता दें कि भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन कोवैक्‍सीन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के सहयोग से विकसित किया गया है। भारत में अभी तक कोवैक्‍सीन, कोविशील्‍ड और स्‍पूतनिक-वी वैक्‍सीन को ही मंजूरी मिली है। ये सभी वैक्‍सीन कोरोना वायरस के खिलाफ काफी प्रभावी बताई जाती हैं।

आइसीएमआर ने यह दावा तो किया है कि कोवैक्‍सीन डेल्‍टा प्‍लस वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी है। लेकिन कितनी प्रभावी है, इसका विवरण नहीं दिया है। बता दें कि डेल्‍ट प्‍लस वेरिएंट काफी तेजी से फैलता है। यह डेल्‍टा वेरिएंट के म्यूटेशन का परिणाम है, जिसके लक्षण लगभग डेल्‍टा वेरिएंट के समान ही होते हैं। कोवैक्‍सीन की प्रभावशीलता कोरोना वायरस के खिलाफ 77.8 फीसद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर के लिए डेल्‍टा प्‍लस वेरिएंट जिम्‍मेदार हो सकता है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान डेल्‍टा वेरिएंट के काफी मामले सामने आए थे।


कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग (EUA) की मंजूरी जल्द ही मिलने  की उम्मीद है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा भारती प्रवीण पवार ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि उम्मीद है कि डब्लूएचओ जल्द ही कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देगा। इससे पहले खबर सामने आी थी कि भारत के इस टीके को 5 अक्टूबर तक आपात उपयोग के लिए डब्लूएचओ से मंजूरी मिलने की संभावना है।

वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक वैक्सीन की सुरक्षा और क्लीनिकल ट्रायल का ​​​​डेटा और जोखिम प्रबंधन योजनाओं और अन्य कार्यान्वयन विचारों पर एक प्रजेंनटेशन देगी। कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसने आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए कोवैक्सीन से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को सौंप दिया है और वैश्विक उससे प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।


कोवैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में 77.8 प्रतिशत की प्रभावी पाया गया था। इसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट की ऑफ वायरोलाजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया था। भारत बायोटेक ने कहा था कि आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए ट्रायल से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी स्पष्टीकरणों का जवाब भी दे दिया गया है।

कोवैक्सीन उन टीकों में शामिल है, जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा कोवीशील्ड नाम से विकसित आक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन और रुस की वैक्सीन स्पुतनिक v का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। डब्लूएचओ ने अब तक फाइजर/बायोएनटेक,आक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनेका, जानसन एंड जानसन, माडर्ना और सिनोफार्म द्वारा निर्मित कोविड -19 के टीकों को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है।