संक्रमितों के मामले में भारत दुनिया के तीसरे स्थान पर

संक्रमितों के मामले में भारत दुनिया के तीसरे स्थान पर

नई दिल्लीः देश इस समय कोरोना महासंकट से जूझ रहा है। प्रतिदिन लाखों लोग कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं। पिछले 24 घंटे में तीन लाख से अधिक नए मरीज मिल रहे हैं। इसके साथ ही कोरोना से मरने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। देश के कई अस्पतालों में बेड, वेंटिलेटर, रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कमी पड़ गई है।

हजारों लोग बिना इलाज के मर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर श्मशान घाटों पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सोमवार को 3.68 लाख से ज्यादा नए कोरोना मरीज मिले हैं और 3,417 लोगों की मौत हो गई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के माने तो देश में बीते 24 घंटों में 3,68,147 नए कोरोना मरीज मिल हैं। इसके साथ ही देश में संक्रमित मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 1,99,25,604 हो गई है। जबकी बीते 24 घंटों में 3,417 लोगों की कोरोना से जान चली गई। इसके साथ कोविड से मरने वालों की संख्या 2,18,959 पहुंच गई।

भारत दुनिया के तीसरे स्थान पर पहुंचा
इस समय भारत में कोरोना का रफ्तार पकड़ लिया है। इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा देश बना गया है। जहां सबसे अधिक लोगों की मौत कोरोना से हो रही है। पहले नंबर पर अमेरिका है जहां पर 591,062 लोगों की मौत हुई है। वहीं दूसरे नंबर पर ब्राजील है जहां पर कोरोना से 407,775 लोगों की मौत हुई है। और तीसरे नंबर पर भारत है जहां पर अब तक 2,18,959 लोगों की मौत हुई है। गौरतलब है क पिछले कई हफ्ते देश में कोरोना का कहर टूट रहा है। इस दौरान 26 लाख से अधिक मामले सामने आए। सात दिनों में कोरोना से 23,800 लोगों की मौत हुई। वहीं शुक्रवार को कुल मामले 4 लाख के पार पहुंच गए थे। यह सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है।


दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश, केजरीवाल सरकार को जोरदार फटकार

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना के कहर को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए केजरीवाल सरकार कोे जोरदार फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि राजधानी के मौजूदा चिकित्सा ढांचे की सारी पोल खुल गई है। महामारी कोरोना के दौर में यह पूरी तरह से गर्त में है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोरोना से पीड़ित सभी नागरिकों को जरूरत के अनुसार उपचार मुहैया कराने का सख्त निर्देश दिया है।

ऐसे में जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार जब यह कहती है कि राज्य में चिकित्सा ढांचा ठीक है, तो वह उस शुतुरमुर्ग की तरह व्यवहार कर रही है, जो अपना सिर रेत में गड़ाए रहता है।

सरकार के पास हालात से निपटने का ढांचा नहीं
कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा से कहा कि जब आप मौजूदा हालात का बचाव करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। हम हमेशा साफ-साफ बात करते हैं।

आगे कोर्ट ने 53 वर्षीय मरीज को आईसीयू बेड दिलाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य का मौजूदा चिकित्सा ढांचा पूरी तरह बेनकाब हो गया है। यह अदालत याचिकाकर्ता की तरह लोगाें को महज यह कह कर नहीं लौटा सकती कि राज्य के पास इस हालत से निपटने का ढांचा नहीं है।

दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा, मौजूदा ढांचे के साथ हम कोरोना से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट यह नहीं कह कसता कि ढांचा गर्त में है। ऑक्सीजन की कमी है, तो ढांचा क्या करेगा। जीवन रक्षक गैस के अभाव में अस्पतालों ने अपने बेड कम कर दिए थे। सरकार ने कई कदम उठाए हैं।

लेकिन राहुल मेहरा की 15000 बेड और 1200 आईसीयू बेड पाइपलाइन में होने की दलील पर हाईकोर्ट एकदम से भड़क उठा। हाईकोर्ट ने कहा कि नहीं यह सही नहीं है। केवल ऑक्सीजन के कारण ऐसा नहीं है। यदि आपके पास ऑक्सीजन हो तो क्या उसके अलावा आपके पास सब कुछ है? पाइपलाइन पाइपलाइन है, अभी वो बेड वजूद में नहीं आए हैं।

आगे कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा ढांचा मुहैया कराना सरकार का दायित्व है, उससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ सकते कि शताब्दी में एक बार हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं। आर्थिक रूप से काफी संपन्न देशों ने भी इतनी बड़ी आपदा में चिकित्सा ढांचे को लेकर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कोरोना मरीजों को अस्पताल की जरूरत है।


जबकि उच्च न्यायालय ने दिल्ली में चिकित्सा उपकरणों की कालाबाजारी को लेकर तल्ख टिप्पणी करते कहा कि लोगों का नैतिक तानाबाना बहुत हद तक 'विखंडित' हो गया है, क्योंकि वे कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए एक साथ आने की बजाय ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में लिप्त हैं।

इस दौर में भी कालाबाजारी
साथ ही जस्टिस विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा हम अभी भी स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं, इसीलिए हम एक साथ नहीं आ रहे हैं। इसी कारण हम जमाखोरी और कालाबाजारी के मामले देख रहे हैं।

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक वकील के उस सुझाव पर की, जिसमें उन्होंने सेवानिवृत्त चिकित्सा पेशेवरों, मेडिकल छात्रों या नर्सिंग छात्रों की सेवाएं मौजूदा स्थिति में लेने को कहा था।

इस पर उन्होंने कहा कि इस समय केवल दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और बिस्तरों की ही नहीं बल्कि चिकित्सा कर्मियों की भी कमी है। वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी की तरह हो, जिससे कोर्ट की सहायता की जा सके।


1,500 रुपये से कम कीमत में आते हैं ये शानदार नेकबैंड ईयरफोन       600mAh की पावरफुल बैटरी के साथ भारत में लॉन्च हुआ ZOOOK का नया वायरलेस माउस       महंगी हुईं आपकी चहेती Mahindra SUVs, जानिए कीमत       Volkswagen T-Roc की बुकिंग शुरू, जानिये कब से मिलेगी डिलीवरी       सिंगल चार्ज में 450 किलोमीटर दौड़ेगी Renault Megane-e SUV, जानें दमदार फीचर्स       Mahindra के बाद अब महंगी होंगी Tata की कारें, जानें नई कीमतें       Honda H’ness CB350 के दाम में फिर हुआ इजाफा, जानें कीमत       Husqvarna Vitpilen 701 स्पेशल एडिशन मॉडल से उठा पर्दा       Covid-19 महामारी के दौरान इमरजेंसी में अगर कार से कर रहे हैं लंबा सफर       सोने के दाम में तेजी, चांदी की कीमत काफी बढ़ी, जानें       IPL में मिले पैसों से अपने पिता का इलाज करवा रहा है ये युवा गेंदबाज, कहा...       IPL 2021 में हर टीम की तरफ से किस गेंदबाज ने लिए सबसे ज्यादा विकेट       इंग्लैंड दौरे और WTC Finals के लिए भारतीय टीम का ऐलान       CSK के इस गेंदबाज की IPL 2021 में जमकर हुई धुनाई       IPL बीच में हुआ स्थगित, अब किस टीम के खिलाफ और कहां मैच खेलेगी टीम इंडिया       Rishabh Pant की गर्लफ्रेंड Isha Negi ने इस खास अंदाज में कही दिल की बात       IPL: टीम के खिलाड़ियों के लिए दिया ये बड़ा 'बलिदान', सोशल मीडिया पर छा गए धोनी       भारतीय क्रिकेटरों को केवल कोविशील्ड वैक्सीन लेने की सलाह       आज हो सकता है भारतीय टेस्ट टीम का ऐलान       इस खिलाड़ी की वाइफ ने दी खुशखबरी, घर में आया ये नया मेहमान