AAP के बागी विधायक कंवर संधू ने कहा, ‘मेरा पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं’

AAP के बागी विधायक कंवर संधू ने कहा, ‘मेरा पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं’

आम आदमी पार्टी (AAP) के बागी विधायक कंवर संधू (Kanwar Sandhu) ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि वो किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होकर 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Elections) लड़ेंगे. संधू ने गुरुवार को साफ कहा कि वो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने जा रहे हैं. दरअसल, पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) के साथ देखे जाने के बाद इन बातों को हवा मिलने लगी थी कि संधू कांग्रेस (Congress) में शामिल होने जा रहे हैं.

मोहाली के खरड़ विधानसभा क्षेत्र (Khara  r Assembly Constituency) के विधायक संधू को आप ने 2018 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निलंबित कर दिया था. अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में संधू ने कहा, ‘उनके पास किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने का ऑप्शन है, लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे.’ संधू ने कहा, ‘क्या मुझे किसी अन्य पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए जैसा कि मेरे कुछ सहयोगियों ने किया है?

‘मेरी अंतरात्मा मुझे पार्टी बदलने की इजाजत नहीं देती’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह ऑप्शन मेरे पास है और इसके अलावा भी मेरे पास कई ऑप्शन हैं. मैंने इसके बारे में विस्तार से भी सोचा. हालांकि मेरी अंतरात्मा मुझे पार्टी बदलने की इजाजत नहीं देती. मैं साफ कर देता हूं कि मैं किसी पार्टी में शामिल नहीं हो रहा हूं. अगर कोई तीसरा या चौथा मोर्चा होता, तो मैं इस पर विचार कर सकता था लेकिन इसकी संभावना ही नहीं है. मैं सार्वजनिक जीवन में एक्टिव रहूंगा. लेकिन मेरा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है. मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं.’

मालूम हो कि संधू को नवंबर 2018 में आप नेतृत्व द्वारा निलंबित कर दिया गया था. उनपर आरोप लगे थे कि उन्होंने और कई अन्य विधायकों ने पार्टी की पंजाब इकाई (Punjab AAP) के लिए स्वायत्तता की मांग की थी. जिन अन्य विधायकों ने मांग रखी थी उनमें से ज्यादातर अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. संधू ने अपने वीडियो में कहा, ‘एक विपक्षी विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों के लिए कुछ भी करने में असमर्थ है क्योंकि सभी शक्तियां सत्ताधारी पार्टी के पास मौजूद हैं.’ उन्होंने कहा, ‘एक विधायक के लिए प्रशासन में भी कोई भूमिका परिभाषित नहीं होती है और न ही उसके पास कोई डेवलपमेंट फंड होता है. वह तभी कुछ कर सकता है जब उसके सत्ता पक्ष के मंत्रियों के साथ अच्छे व्यक्तिगत संबंध हों.’


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।