सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट को बारहवीं की वैकल्पिक परीक्षा का सौंपा विवरण

सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट को बारहवीं की वैकल्पिक परीक्षा का सौंपा विवरण

सीबीएसई के बारहवीं के मूल्यांकन और रिजल्ट से संतुष्ट न होने वाले छात्र वैकल्पिक परीक्षा दे सकते हैं। अगर परिस्थितियां ठीक रहीं तो वैकल्पिक परीक्षा 15 अगस्त से 15 सितंबर के बीच होगी। वैकल्पिक लिखित परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए परीक्षा में मिले अंक ही अंतिम माने जाएंगे।

सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 12वीं का रिजल्ट 31 जुलाई तक, इम्प्रूवमेंट परीक्षाएं भी होंगी

ये जानकारी सीबीएसई ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को दी। सीबीएसई ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के सुझाव के मुताबिक मूल्यांकन नीति में ये चीजें शामिल कर दी गई हैं। बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि बारहवीं का रिजल्ट 31 जुलाई तक घोषित कर दिया जाएगा।

रिजल्ट से असंतुष्ट छात्र दे सकते हैं वैकल्पिक परीक्षा

जो लोग रिजल्ट और मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं होंगे वे वैकल्पिक परीक्षा दे सकते है। इस परीक्षा में शामिल होने वालों के लिए लिखित परीक्षा के अंकों को ही अंतिम माना जाएगा। वैकल्पिक परीक्षा के लिए आनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा। वैकल्पिक परीक्षा परिस्थितियां ठीक होने पर सिर्फ मुख्य विषयों की ही होंगी। सीबीएसई ने कोर्ट को विवाद निवारण तंत्र की जानकारी देते हुए बताया कि एक कमेटी रिजल्ट पर छात्रों की आपत्तियां देखेगी।

आइसीएसई बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट को कहा- 12वीं का रिजल्ट 31 जुलाई के पहले होगा घोषित

आइसीएसई बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बारहवीं का रिजल्ट 31 जुलाई के पहले घोषित कर दिया जाएगा। मूल्यांकन और रिजल्ट से संतुष्ट न रहने वाले छात्र सुधार के लिए इम्प्रूवमेंट परीक्षा दे सकते हैं। रिजल्ट घोषित होने के बाद जल्दी से जल्दी इम्प्रूवमेंट परीक्षा कराई जाएगी।


इम्प्रूवमेंट परीक्षा एक सितंबर से पहले

हालात सही रहने पर इम्प्रूवमेंट परीक्षा एक सितंबर से पहले करा ली जाएगी। इस परीक्षा का कार्यक्रम परीक्षा से पहले जारी किया जाएगा। विवाद निवारण तंत्र की भी जानकारी दी है और कहा है कि कोर्ट के निर्देशानुसार इन सब चीजों को नीति में शामिल कर दिया गया है।

पीठ ने सभी याचिकाओं को जून 22 को सुनवाई पर लगाने का दिया आदेश 

सोमवार को मामले पर सुनवाई के दौरान पैरेन्ट एसोसिएशन और अन्य छात्रों की ओर से मूल्यांकन प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए गए। पैरेन्ट एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि कई और रिट याचिकाएं इस संबंध में दाखिल हुई हैं जो कि अभी कोर्ट के सामने सुनवाई पर नहीं लगी हैं। पीठ ने सभी याचिकाओं को मंगलवार को सुनवाई पर लगाने का आदेश देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।

असम, त्रिपुरा और कर्नाटक ने बोर्ड की परीक्षाएं निरस्त की जानकारी कोर्ट को दी

इसके अलावा असम, त्रिपुरा और कर्नाटक की ओर से सोमवार को कोर्ट को बताया गया कि स्टेट बोर्ड की परीक्षाएं निरस्त कर दी गई हैं। इस मामले पर भी मंगलवार को सुनवाई होगी।


पीएम मोदी से मिले पूर्वोत्तर के भाजपा सांसद, किरेन रिजिजू का विपक्ष पर वार, कहा...

पीएम मोदी से मिले पूर्वोत्तर के भाजपा सांसद, किरेन रिजिजू का विपक्ष पर वार, कहा...

असम-मिजोरम सीमा पर हाल में हुए विवाद के बाद पूर्वोत्तर के भाजपा सांसदों ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान सांसदों ने पीएम को ज्ञापन सौंपा, जिसमे कांग्रेस पर हिंसा का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया गया है। भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और विदेशी ताकतें लोगों को भड़का रहीं हैं और भाईचारा बिगाड़ने की कोशिश कर रहीं हैं।

कांग्रेस और दूसरी राजनीतिक पार्टियां आग में घी डालने का कर रही काम

इसके साथ ही सौंपे गए ज्ञापन में लिखा गया है कि सीमा विवाद पुराना है, लेकिन कांग्रेस और दूसरी राजनीतिक पार्टियां आग में घी डालने का काम कर रहीं हैं। लगातार हिंसा को भड़काने के लिए भड़काऊ बयान दे रहे हैं। लोगों को भड़काया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी विदेशों से कुछ ऐसी चीजें पोस्ट की जा रहीं हैं, जिससे आशंति पैदा हो।


मोदी के नेतृत्व में पूर्वोतर का हुआ विकास

इसके साथ ही ज्ञापन में लिखा है कि पूर्वोत्तर में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जो विकास हुआ है, वैसा कभी नहीं हुआ। पिछले 7 सालों में पूर्वोत्तर में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर 2 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। जो लोग पूर्वोत्तर में सुख और शांति बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। हम उसकी निंदा करते हैं।

 
किरेन रिजिजू बोले- संवेदनशील मामले पर ना करें राजनीतिकरण

वहीं बैठक के खत्म होने के बाद केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि हमने पीएम का आभार व्यक्त किया और उन्हें बताया कि कैसे कांग्रेस और दूसरी राजनीतिक पार्टियां हिंसा का राजनीतिकरण करके पूर्वोत्तर की शांति बिगाड़ में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने ये भी कहा कि हम कांग्रेस से इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील करते हैं।

 
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो असम-मिजोरम के बीच जारी सीमा विवाद के कारण 26 जुलाई को हुए संघर्ष में असम पुलिस के कम से कम 6 कर्मियों और एक आम नागरिक की मौत हो गई थी। इसके साथ ही 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे। ताजा स्थित की बात करें ते कछार जिले में असम-मिजोरम सीमा पर सोमवार को शांति रही।