बांग्लादेश: मलेशिया के विमान में ‘बम’ की खबर से मची अफरा-तफरी, ढाका में हुई इमरजेंसी लैंडिंग

बांग्लादेश: मलेशिया के विमान में ‘बम’ की खबर से मची अफरा-तफरी, ढाका में हुई इमरजेंसी लैंडिंग

Malaysia Airlines Plane Bomb threat: बांग्लादेश के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बुधवार रात घोषणा करते हुए बताया कि ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Hazrat Shahjalal International Airport) (एचएसआईए) पर यात्रियों, उनके सामान और विमान की गहन तलाशी के बाद मलेशियाई एयरलाइंस के विमान में बम की खबर ‘निराधार’ निकली है. एचएसआईए के कार्यकारी निदेशक ग्रुप कैप्टन एएचएम तौहीद-उल अहसान ने व्यापक सुरक्षा तलाशी की प्रक्रिया पूरी होने पर आधी रात के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मलेशिया से एक फोन कॉल पर हमें जो जानकारी मिली, वह निराधार साबित हुई. कुछ भी नहीं मिला है.’

उन्होंने कहा कि सेना के कमांडो, वायु सेना की बम निरोधक इकाइयों, विशिष्ट अपराध रोधी रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) और विभिन्न खुफिया एजेंसियों और दमकलकर्मियों को ‘हमारी एसओपी’ या मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप बुलाकर तलाशी अभियान चलाया गया था (Malaysia Plane in Dhaka). अहसान ने फोन करने वाले स्रोत की पहचान जाहिर करने से इनकार कर दिया, लेकिन बताया कि आरएबी को यह फोन आया था.

मलेशिया के अधिकारी क्या बोले?

मलेशियाई अधिकारियों के साथ बाद में की गई बातचीत और खुफिया रिपोर्टों में भी सुझाव दिया गया कि विमान में ऐसा कोई खतरा नहीं था. उन्होंने कहा कि एसओपी का पालन करने के लिए विमान के केबिन, यात्रियों और उनके सामान की गहन जांच की गई क्योंकि यह सभी के लिए एक सुरक्षा का विषय था. हवाई अड्डे के अधिकारी के अनुसार निर्धारित विमान में 135 यात्री सवार थे, जिनमें 134 बांग्लादेशी और एक मलेशियाई नागरिक था.

रात को आपात स्थिति में उतरा विमान

विमान बुधवार रात करीब नौ बजकर 40 मिनट पर एचएसआईए (HSIA) में आपात स्थिति में उतरा, जिसके बाद कमांडो और सुरक्षा एजेंसियों ने घटनास्थल पर मोर्चा संभाला और दमकलकर्मियों एवं एम्बुलेंस को सतर्क स्थिति में तैनात रखा गया. हवाई अड्डे के अधिकारियों ने पहले बताया था कि यात्रियों को बाद में पूरी सुरक्षा तलाशी के बाद उतारा गया, जबकि विमान को यात्री सामान और केबिन की जांच के लिए टर्मिनल क्षेत्र से दूर सुरक्षित स्थान ले जाया गया.


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

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नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।