अमितजी, आपके कारण जम्मू कश्मीर में हुआ नए युग का सूत्रपात : जस्टिस अरुण मिश्रा

अमितजी, आपके कारण जम्मू कश्मीर में हुआ नए युग का सूत्रपात : जस्टिस अरुण मिश्रा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह से कहा कि 'आपके अथक प्रयासों से जम्मू-कश्मीर व उत्तर-पूर्व में शांति व कानून व्यवस्था के एक नए युग का सूत्रपात हुआ है।' एनएचआरसी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में आये गृहमंत्री अमित शाह का अभिनंदन करते हुए मंगलवार को जस्टिस मिश्रा ने यह बात कही। साथ ही बाहरी ताकतों द्वारा भारत पर मानवाधिकार अधिकारों के हनन का छद्म आरोप लगाने और देश विदेश में हो रही राजनीतिक हिंसा पर भी चिंता जताई।

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और जम्मू कश्मीर को दो भागों में बांट कर जम्मू कश्मीर को एक और लद्दाख को दूसरा केंद्र शासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव संसद में पेश कर पारित कराया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में जस्टिस मिश्रा इसी ओर इशारा कर रहे थे।


एनएचआरसी अध्यक्ष जस्टिस मिश्रा ने मानवाधिकारों के प्रति चिंता जताते हुए कहा कि मानव ही मानवता के विनाश पर आमादा है। यह दुर्भाग्य है कि देश विदेश में राजनीतिक हिंसा आज भी समाप्त नहीं हुई है। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि निर्दोष व्यक्तियों के हत्यारों को गौरवान्वित नहीं किया जा सकता। ऐसे छद्म आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी कहना अनुचित है हालांकि उन्होंने इस बात को ज्यादा विस्तार नहीं दिया।


जस्टिस मिश्रा ने पुलिस जांच तंत्र को और सुदृढ़ बनाए जाने पर दिया और जोर

उन्होंने कहा कि समाजसेवी संस्थाओं और मानवाधिकार संरक्षकों को राजनैतिक हिंसा व आतंकवाद की घोर निंदा करनी चाहिए। इस संबंध में उदासीनता कट्टरवाद को जन्म देगी और इतिहास हमें इसके लिए कभी क्षमा नहीं करेगा। समय आ गया है जब हमें इसका डटकर प्रतिरोध करना होगा, कम से कम इस हिंसा के विरुद्ध आवाज तो उठानी ही होगी। उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी ताकतों द्वारा भारत पर मानवाधिकारों के हनन का छद्म आरोप लगाना सामान्य बात हो गई है। इसके प्रतिकार के साथ ही संस्कृति तथा प्रचलित भाषाओं को समूल नष्ट करने के प्यासों का पुरजोर प्रतिरोध भी आवश्यक है। जस्टिस मिश्रा ने पुलिस जांच तंत्र को और सुदृढ़ बनाए जाने पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस अन्वेषण प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं स्वतंत्र बनाए जाने की आवश्यकता है। यह प्रणाली ऐसी हो कि सीबीआइ जांच की जरूरत ही न पड़े। पुलिस मुठभेड़ों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि तत्काल न्याय की आड़ में पुलिस द्वारा मुठभेड़ और इस हेतु उकसाना असंवैधानिक और निंदनीय कृत्य है। हमें इस बर्बरता से मुक्ति पाने का प्रयास करना होगा।


आरक्षण का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों पर जोर देते हुए जस्टिस मिश्रा ने कहा आरक्षण का लाभ उन्नत आरक्षित वर्ग के उपभोग कर लेने के कारण अभी तक इस वर्ग की पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक लाभ नहीं पहुंच पाया है।

जस्टिस मिश्रा ने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आयोग द्वारा किये जा रहे कामों और निस्तारित की गई शिकायतों का ब्योरा देते हुए कहा कि आयोग का प्रयास अपने प्रतीक चिह्न की मूल भावना को सार्थक करना है जो कि यह इंगित करता है कि सूर्य की किरणें आशा व गति की सूचक हैं। वे बिना किसी भेदभाव के सबको लाभ पहुंचाती हैं।


भारत ने पाकिस्तानी NSA को दिया न्योता, अफगानिस्तान के मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक

भारत ने पाकिस्तानी NSA को दिया न्योता, अफगानिस्तान के मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक

अफगानिस्‍तान की स्थिति पर द‍िल्‍ली में अगले महीने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक होनी है। इसकी मेजबानी भारत करेगा। इस बैठक में कई अन्‍य देशों के साथ रूस और पाकिस्‍तान को भी न्‍योता दिया गया है। बैठक की अध्‍यक्षता भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल करेंगे। माना जाता है कि इस क्षेत्रीय सम्‍मेलन में चीन, इरान, तजाकिस्‍तान और उजबेकिस्‍तान को भी बुलाया गया है। इसमें अफगानिस्‍तान में मानवीय संकट के मसलों पर बातचीत होगी। साथ ही सुरक्षा मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। 


प्रस्तावित वार्ता 10-11 नवंबर को हो सकती हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक यह सम्मेलन 2019 में ईरान में पहले आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन के समान प्रारूप में होगा। एनएसए-स्तरीय बैठक में आमंत्रित लोगों में अफगानिस्तान के पड़ोसी देश- रूस, चीन, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। पता चला है कि उस आमंत्रण को पाकिस्तान के एनएसए मोईद युसूफ को भी दे दिया गया है, हालांकि सम्मेलन और आमंत्रण पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, पता चला है कि तैयारी चल रही है।


तालिबान से दुनिया को जैसी अपेक्षाएं हैं, उसके बारे भी अवगत कराया जाएगा। बताया जा रहा है कि जिन देशों के एनएसए को आमंत्रित किया गया है, उन्‍हें पहले ही भारत से निमंत्रण मिल चुका है। हालांकि, इस कॉन्‍फ्रेंस में तालिबान को न्‍योता नहीं दिया गया है। यह बैठक नवंबर के दूसरे हफ्ते में प्रस्‍तावित है।

रूस ने भी 20 अक्‍टूबर को मॉस्‍को में इसी तरह का सम्‍मेलन रखा है। इसमें भारत के साथ-साथ उसने तालिबान को भी बुलाया है। हालांकि, भारत सरकार तालिबान को यहां बुलाने को लेकर अभी असमंजस में है। कारण है कि तालिबान को अभी अंतरराष्‍ट्रीय बिरादरी की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। खासतौर से मानवाधिकार से जुड़े मसलों को लेकर अभी उससे कहीं ज्‍यादा अपेक्षा हैं। इनमें महिलाओं, बच्‍चों और अल्‍पसंख्‍यकों के मानवाधिकार शामिल हैं।


यह देखना दिलचस्‍प होगा कि पाकिस्‍तान कॉन्‍फ्रेंस में क्‍या भूमिका अदा करता है। देखने वाली बात तो यह भी होगी कि पाकिस्‍तानी एनएसए मोईद यूसुफ आते हैं कि नहीं। अगर ऐसा होता है तो 2016 में अमृतसर में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश सलाहकार सरताज अजीज के बाद दोनों ओर से यह किसी उच्‍चाधिकारी का पहला दौरा होगा। इस साल मई में भी भारत ने अफगानिस्‍तान पर कॉन्‍फ्रेंस का प्रस्‍ताव किया था। तब भी यूसुफ को न्‍योता दिया गया था। हालांकि, दिल्‍ली में कोरोना की दूसरी लहर के कारण यह बैठक नहीं हो पाई थी।