जानें कब से शुरु हो रही है चैत्र नवरा​त्रि? कब है राम नवमी और महाष्टमी

जानें कब से शुरु हो रही है चैत्र नवरा​त्रि? कब है राम नवमी और महाष्टमी

होली के बाद मां दुर्गा की आराधना के लिए समर्पित चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ होता है। वर्ष में दो बार चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की विधि विधान से पूजा की जाती है। हालांकि कि गुप्त नवरात्रि भी आती है, लेकिन चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि की लोक मान्यता ज्यादा है। चैत्र नवरात्रि के समय ही राम नवमी का पावन पर्व भी आता है। चैत्र नवमी के दिन भगवान राम का जन्म हुआ था, इसलिए इसे राम नवमी कहा जाता है। जागरण अध्यात्म में आज हम जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ कब से होने वाला है? महाष्टमी कब है? राम नवमी कब है और चैत्र नवरात्रि का पारण कब होगा?

चैत्र नवरात्रि 2021 कैलेंडर

चैत्र नवरात्रि का पहला दिन: घट स्थापना

चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ 13 अप्रैल दिन मंगलवार से हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन को प्रतिपदा कहते हैं और इस दिन नवरात्रि की कलश स्थापना या घट स्थापना होती है। शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के साथ ही मां शैलपुत्री की पूजा विधि विधान से की जाती है।


चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी पूजा

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन यानी चैत्र नवरात्रि की द्वितीया 14 अप्रैल दिन बुधवार को है। इस दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन: चंद्रघंटा पूजा

चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन यानी चैत्र नवरात्रि की तृतीया 15 अप्रैल दिन गुरुवार को है। इस दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरुप की पूजा होती है।


चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन: कुष्मांडा पूजा

चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन यानी चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी 16 अप्रैल दिन शुक्रवार को है। इस दिन कुष्मांडा देवी की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन: स्कन्दमाता पूजा

चैत्र नवरात्रि का पांचवा दिन यानी चैत्र नवरात्रि की पंचमी 17 अप्रैल दिन शनिवार को है। पंचमी के दिन मां स्कन्दमाता की पूजा होती है। भगवान कार्तिकेय को स्कन्दकुमार भी कहा जाता है। इसे लक्ष्मी पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।

चैत्र नवरात्रि का छठा दिन: कात्यायनी पूजा

चैत्र नवरात्रि का छठा दिन यानी चैत्र नवरात्रि की षष्ठी 18 अप्रैल दिन रविवार को है। इस दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है।

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: कालरात्रि पूजा

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन यानी चैत्र नवरात्रि की सप्तमी 19 अप्रैल दिन सोमवार को है। इसे महासप्तमी भी कहते हैं। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है।


चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन: महागौरी की पूजा

चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन यानी चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी 20 अप्रैल दिन मंगलवार को है। दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरुप की पूजा होती है।

चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन: राम नवमी

चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन या राम नवमी 21 अप्रैल दिन बुधवार को है। इस दिन त्रेतायुग में श्रीराम अयोध्या में राजा दशरथ के घर जन्मे थे। इस वजह से इस दिन को राम नवमी कहा जाता है। राम नवमी के दिन व्रत रखते हुए श्री राम की पूजा की जाती है।


चैत्र नवरात्रि का दसवां दिन: पारण

चैत्र नवरात्रि का पारण इस वर्ष 22 अप्रैल दिन गुरुवार को किया जाएगा। इस दिन वे लोग पारण करते हैं, जो नवरात्रि के 9 दिनों तक व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की ​विधि विधान से पूजा करते हैं।


क्या आप भी करते हैं खाना खाते समय ये गलतियां तो मां लक्ष्मी हो सकती हैं नाराज

क्या आप भी करते हैं खाना खाते समय ये गलतियां तो मां लक्ष्मी हो सकती हैं नाराज

हिंदू धर्म में खाने का भी तरीका और नियम बताए हैं। धार्मिक मान्यतानुसार, रात के समय में कुछ चीजों का खाना मना किया गया है। कहा जाता है अगर रात के समय कुछ चीजों का सेवन किया जाए तो व्यक्ति के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। इसका असर आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। इससे मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं जिससे व्यक्ति को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसे में खाना खाते समय कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद आवश्यक होता है। तो आइए जानते हैं खाने से जुड़े कुछ नियम।

रात को न करें इन चीजों का सेवन:

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रात के समय अगर दूध का सेवन किया जाए तो बेहतर होता है। लेकिन रात में दही नहीं खानी चाहिए। इसका एक कारण यह भी होता है कि यह ठंडा पदार्थ है और रात को इसे खाने से व्यक्ति की तबियत खराब हो सकती है। वहीं, कहा जाता है कि इससे धन की हानि होती है। इसके अलावा चावल, सत्तू, मूली भी रात में नहीं खानी चाहिए।


दिशा का रखें खास ख्याल:

कहा जाता है कि भोजन करते समय दिशा का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी होता है। इस दौरान मुंह पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। अगर ऐसा न हो तो धन की हानि हो सकती है। जूते पहनकर या सर ढककर भी भोजन नहीं करना चाहिए। खाना खाने की सबसे अच्छी जगह रसोई घर बताई गई है। मान्यता है कि इससे राहु ग्रह शांत होता है।

स्नान कर ही खाएं खाना:


कहा जाता है कि खाना स्नान करने के बाद ही खाया जाना चाहिए। पहली रोटी के 3 हिस्से करें और इसका एक हिस्सा गाय, दूसरा हिस्सा कुत्ता और तीसरा हिस्सा कौवे के लिए निकाल लें। इसके बाद अग्निदेव को भोग लगाएं। इसके बाद घर वालों को भोजन खिलाएं।

इस तरह न करें भोजन:

खाना कभी-भी टूटे-फूटे बर्तनों या हाथ पर रखकर नहीं खाना चाहिए। वहीं, पीपल और वटवृक्ष के नीचे भोजन नहीं करना चाहिए।


न करें खाने का अपमान:

भोजन का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। साथ ही चाहें कितना भी गुस्सा क्यों न हो, न तो भोजन छोड़ना चाहिए और ही फेंकना चाहिए।  


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