नाखून चबाना आपके सेहत के लिए क्यों होता हैं जरुरी, आइए जानिए

नाखून चबाना आपके सेहत के लिए क्यों  होता हैं जरुरी, आइए जानिए

नाखून चबाना या अंगुठा चूसना बुरी बात है. कुर्सी पर बैठे-बैठे पैर हिलाना या टेबल पर उंगलियां थपथपाना भी अच्छा नहीं. आमतौर पर हर इनसान को बचपन से ही ऐसी सीख दी जाती है.

 हालांकि, ‘हफिंगटन पोस्ट’ ने विभिन्न अध्ययनों के आधार पर उन निगेटिव आदतों के बारे में बताया है, जो कई मामलों में ‌फायदेमंद भी हैं.

1-दिन में सपने देखना-
-दिन में सपने देखने वाले न सिर्फ ज्यादा रचनात्मक होते हैं, बल्कि उनकी उत्पादन क्षमता भी अधिक पाई गई है. 2010 में ‘द हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू’ में प्रकाशित एक ब्रिटिश अध्ययन में दावा किया गया था कि कार्य में अटकने पर आदमी अगर दस से 12 मिनट का ब्रेक ले व सपनों की संसार में खो जाए तो उसे संबंधित समस्या का हल ढूंढने में ज्यादा सरलता होती है.

2-चुगली करना-
-चुगली करने के लिए बदनाम शख्स कभी भरोसेमंद नहीं माना जाता. लोग उससे दूर रहने में ही भलाई समझते हैं. हालांकि, 2012 में प्रकाशित एक अमेरिकी अध्ययन की मानें तो चुगली करने से न सिर्फ स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का उत्पादन घटता है, बल्कि हृदयगति नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है. ऐसे में जिस चुगली से किसी का नुकसान न हो, उसे करने में कोई बुराई नहीं है.

3-कुर्सी पर बैठे-बैठे पैर हिलाना-
-कुर्सी पर बैठे-बैठे पैर हिलाने की आदत असभ्यता की निशानी मानी जाती है. हालांकि, एक अमेरिकी अध्ययन पर गौर करें तो कार्यालय में कुर्सी पर बैठकर कार्य करने के दौरान पैर हिलाते रहने से नसों में खून का प्रवाह सुचारु बनाए रखने में मदद मिलती है. यही नहीं, इससे शरीर को कुछ हद तक व्यायाम जितना फायदा भी मिलता है. डेस्क पर उंगली थपथपाना भी स्वास्थ्य के लिए‌ लाभकारी है.

4-सामान फैलाए रखना-
-क्या आपके घर या कार्यालय में सामान अक्सर फैला रहता है? क्या लोग आपको अ‌व्यवस्थित होने के लिए ताने मारते हैं? अगर हां तो निराश मत होइए. एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि सामान तितर-बितर रहने से आदमी कार्य पर ज्यादा ध्यान देने व निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित होता है. वह हर समय सुव्यवस्थि तरीका से कार्य करने की कोशिशों में जुटा रहता है.

5-च्युइंग गम खाना-
-च्युइंग गम चबाने से सिर्फ एकाग्रता ही नहीं, उत्पादन क्षमता भी बढ़ाने में मदद मिलती है. एक ऑस्ट्रेलियाई शोध में देखा गया कि आईक्यू जांचने के लिए हुई इम्तिहान में उन प्रतिभागियों ने ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया, जो च्युइंग गम चबाते हुए सवाल हल कर रहे थे. एक अन्य अध्ययन में च्युइंग गम को फील गुड हार्मोन का स्त्राव बढ़ाने व स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का उत्पादन घटाने में अच्छा पाया गया है.

6-नाखून चबाना, अंगुठा चूसना-
-हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने एक हजार बच्चों की स्वास्थ्य पर तब से नजर रखी, जब वे पांच वर्ष के थे. पांच, सात, नौ व 11 वर्ष की आयु में अभिभावकों से पूछा गया कि बच्चों को नाखून चबाने या अंगुठा चूसने की आदत तो नहीं थी. जब बच्चे 13 व 32 साल के हुए, तब उनकी एलर्जी जाँच की गई. नाखून चबाने व अंगुठा चूसने वालों में एलर्जी के मुद्दे कम देखने को मिले.

7-टाल-मटोल करना-
-आलस्य वाकई बुरी बला है. लेकिन कई बार टाल-मटोल करना लाभकारी भी साबित होता है. वॉर्टन स्कूल ऑफ बिजनेस के हालिया अध्ययन से पता चलता है कि कार्य टालने से आदमी को नए आइडिया तलाशने के लिए ज्यादा समय मिल पाता है. इससे उसकी रचनात्मकता व उत्पादकता, दोनों में ही इजाफा होता है. एप्पल निर्माणकर्ता स्टीव जॉब्स नए आविष्कार के लिएकाम से कुछ समय का ब्रेक जरूर लेते थे.