मास्क लगाने से लोगों को मनोवैज्ञानिक तौर पर मिलती हैं प्रेरणा

मास्क लगाने से लोगों को मनोवैज्ञानिक तौर पर मिलती हैं प्रेरणा

फेस मास्क लगाने  से न सिर्फ वायरस से सुरक्षा मिलती है बल्कि मास्क लगाने वाले अपने हाथ साफ करना नहीं भूलते. ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में इस बात का पता लगाया है.

यह शोध बीएमजे जर्नल में प्रकाशित हुआ. इस वक्त संसार के 160 राष्ट्रों में मास्क लगाना जरूरी है पर अमेरिका व यूरोप के राष्ट्रों में अब भी मास्क लगाने को लेकर लोग सहमत नहीं हैं. 

कुछ लोग कहते हैं कि जिस तरह हेलमेट लगाकर लोग लापरवाही में तेज साइकिल चलाते हैं, वैसे ही मास्क लगाने के बाद लोग वायरस से बचाव के उपायों के प्रति लापरवाह हो जाते हैं. इसी तर्क की वैज्ञानिकता जांचने के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी व किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ता दल ने अध्ययन किया.  वैज्ञानिकों को शोध में इस बात का एक भी आधार नहीं मिला. बल्कि उनका बोलना है कि मास्क लगाने वाले लोग अपने हाथ धोने को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं. 

ऐसे किया अध्ययन- 
वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने के लिए प्रतिभागियों के एक समूह को मास्क पहनकर व दूसरे समूह को बिना मास्क के रखा. उन्हें ऐसे वातावरण में रखा गया जहां पर सर्दी खांसी फैलाने वाले वायरसों की मौजूदगी की आसार अधिक थी. 22 क्रमबद्ध समीक्षा में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो प्रतिभागी मास्क लगा रहे थे, वे अपनी सतर्कता के प्रति ज्यादा गंभीर थे.  जबकि मास्क न लगाने वाले प्रतिभागी अपने हाथ भी नियमित रूप से नहीं धो रहे थे.

मनोवैज्ञानिक प्रेरणा-
इस आधार पर वैज्ञानिक चिकित्सक जुलियन तांग का बोलना है कि मास्क लगाने से लोगों को मनोवैज्ञानिक तौर पर प्रेरणा मिलती है कि जिससे वे खुद को सुरक्षित करने के लिए ज्यादा गंभीर कदम उठाते हैं. वे कहते हैं कि मास्क पहनने वाले से व्यवहार का यह परिवर्तन संक्रमण रोकने अहम है.