इस व्यवहार से प्राचीन पूर्वजों का आत्म-वर्चस्व समाप्त हो गया, जानिए कारण

इस व्यवहार से प्राचीन पूर्वजों का आत्म-वर्चस्व समाप्त हो गया, जानिए कारण

आपको यकीन हो या न हो लेकिन हमारे पूर्वज प्रेम हासिल करने के मुद्दे में हमसे ज्यादा स्मार्ट थे। एक नए अध्ययन के मुताबिक़, नियंडरथल लोग जानते थे कि साथी को आकर्षित करने के लिए चेहरे के हाव भाव कैसे होने चाहिए व मुस्कराहट कैसी होनी चाहिए। मिलान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं (University of Milan) ने नियंडरथल लोगों के जेनेटिक (अनुवांशिक) सैंपल लिए।

सैंपल की जाँच में यह बात सामने आई कि जीन म्यूटेशन मानव को 'कम आक्रामक साथी से सेक्स करने के लिए प्रेरित कर सकता है।


इस व्यवहार से प्राचीन पूर्वजों का आत्म-वर्चस्व समाप्त हो गया है। विज्ञान एडवांस में प्रकाशित अध्ययन का हवाला देते हुए sciencemag.org में इस बात का जिक्र है कि आधुनिक मनुष्य ने अपने प्राचीन विलुप्त हो चुके पूर्वजों (निएंडरथल व डेनिसोवन्स) से अलग होने के बाद खुद को घरेलू माहौल में जीने के लिए ढाला।


इटली में मिलान विश्वविद्यालय में molecular biologist Giuseppe Testa व उनके सहकर्मियों इस बारे में जानते थे कि BAZ1B, नाम का जीन तंत्रिका शिखा कोशिकाओं की सामान्य गतिविधि करने में जरूरी किरदार निभाता है। अधिकतर लोगों में इसी जीन की दो कॉपी पाई जाती है।

बताते चलें कि BAZ1B की एक कॉपी, विलियम्स-बेयर्न सिंड्रोम से प्रभावित लोगों में नहीं होती है, यह एक ऐसा विकार जो संज्ञानात्मक हानि (cognitive impairments) व दोस्ती से बेहद जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए दो निएंडरथल व एक डेनिसोवैन की मानव स्टेम कोशिकाओं (human stem cells) का जेनेटिक डाटा निकाला। मनुष्य की यह दोनों प्राचीन प्रजातियां एक ही समय में पाई जाती थीं। NYPost की रिपोर्ट के मुताबिक़, BAZ1B वहीं जीन है जिसके जरिए कुत्ते अपनी आंखों के हाव भाव के जरिये अपने एहसास जता पाते हैं लेकिन भेड़िये ऐसा नहीं कर पाते।