जन्माष्टमी पर ऐसी रहेगी ग्रहों की स्थिति

जन्माष्टमी पर ऐसी रहेगी ग्रहों की स्थिति

इस वर्ष तिथियों की घट-बढ़ की वजह से रक्षा बंधन दो दिन मनाया जाएगा. इसके बाद श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी दो दिन मनेगा. कुछ जगहों पर 11 अगस्त को और कुछ जगहों पर 12 अगस्त को रक्षा बंधन मनेगा. इसी तरह 18 और 19 अगस्त को जन्माष्टमी रहेगी.

ज्योतिषाचार्य पं निलेश शास्त्री के अनुसार 18 अगस्त (गुरुवार) को भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी की तिथि रात में करीब 9.22 बजे प्रारम्भ हो जाएगी और अगले दिन यानी 19 अगस्त (शुक्रवार) की रात करीब 11 बजे तक रहेगी. ऐसे में वैष्णव मत और स्मार्त मत को मानने वाले लोग भिन्न-भिन्न दिन जन्माष्टमी मनाएंगे. हमें अपने-अपने क्षेत्रों के पंचांगों और विद्वानों के मतों के आधार ये पर्व मनाना चाहिए.

जन्माष्टमी पर ऐसी रहेगी ग्रहों की स्थिति

जन्माष्टमी पर चंद्र वृषभ राशि में रहेगा. मेष राशि में राहु, वृषभ राशि में चंद्र-मंगल की युति से लक्ष्मी योग बनेगा. कर्क राशि में शुक्र रहेगा. सिंह राशि में सूर्य-बुध ग्रह का बुधादित्य योग रहेगा. तुला राशि में केतु और मकर राशि में शनि रहेगा. बृहस्पति मीन राशि में रहेगा.

20 अगस्त (शनिवार) को रोहिणी नक्षत्र की आरंभ रात करीब 1.53 होगी. इस दिन मंदिरों में नंदोत्सव मनाया जाएगा. 20 अगस्त की सुबह सूर्योदय से सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग रहेगा. इस तरह 18, 19 और 20 अगस्त यानी तीन दिनों तक श्रीकृष्ण की भक्ति करने का शुभ योग बन रहा है.

ऐसे कर सकते हैं जन्माष्टमी व्रत

जन्माष्टमी पर सुबह शीघ्र उठकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें. इसके बाद घर के मंदिर में बाल गोपाल की पूजा करें. अभिषेक करें, नए वस्त्र पहनाएं. चंदन से तिलक करें. इत्र आदि चीजें चढ़ाएं. श्रृंगार करें. माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं. धूप-दीप जलाएं. कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें.

ये है श्रीकृष्ण के जन्म की संक्षिप्त कथा

द्वापर युग में कंस और अन्य अधर्मी राजाओं का अत्याचार काफी बढ़ गया था. कंस को अपनी बहन देवकी से बहुत स्नेह था. जब देवकी का शादी वसुदेव हुआ तो कंस इन्हें इनके राज्य तक छोड़ने जा रहा था. उस समय आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान तुम्हारे वध का कारण बनेगी. ये सुनने के बाद कंस देवकी को मारना चाहता था, लेकिन वसुदेव ने कंस से बोला कि वे उनकी आठों संतान आपको सौंप देंगे, लेकिन आप देवकी को न मारे.

कंस ने वसुदेव की बात मान ली और इन दोनों को कारागृह में डाल दिया. कंस ने एक के बाद एक 6 संतानों को मार दिया. सातवीं संतान को भगवान की माया ने देवकी के गर्भ से वसुदेव जी की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में पहुंचा दिया. इसके बाद आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ. वसुदेव ने श्रीकृष्ण को यशोदा के यहां पहुंचा दिया था. बाद में श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और अपने माता-पिता को कारागृह से मुक्त कराया. श्रीकृष्ण ने सभी अधर्मी राजाओं का वध किया. महाभारत युद्ध में पांडवों की सहायता की और कौरव वंश नष्ट किया.