आर्कटिक क्षेत्र में चीन-अमरीकी-रूस के बीच बढ़ा तनाव

आर्कटिक क्षेत्र में चीन-अमरीकी-रूस के बीच बढ़ा तनाव

चाइना एक ओर जहां हिन्द महासागर में अपनी पकड़ बनाने के लिए कोशिश कर रहा है वहीं आर्कटिक क्षेत्र में भी अपनी दबदबा बढ़ाने की प्रयास में है. यही कारण है कि चाइना ने आर्कटिक में सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी है.

 

डेनमार्क की एक इंटेलिजेंस सर्विस ने शुक्रवार को जानाकारी देते हुए बताया कि चाइना की सेना आर्कटिक क्षेत्र में तेजी से साइंटिफिक रिसर्च कर रही है. इंटेलिजेंस एजेंसी ने इससे संसार के बर्फीले हिस्से में भू सियासी प्रतिद्वंद्विता बढ़ने की चेतावनी दी है.

 

ग्लोबल वॉर्मिंग व खनिज तक पहुंच को लेकर आर्कटिक में टकराव मई में उस समय खुलकर सामने आ गया था जब अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने रूस पर आक्रामक रवैये का आरोप लगाया था व बोला था कि चाइना के ऐक्शन पर भी ध्यान रखने की आवश्यकता है.

आर्कटिक क्षेत्र में चीन-अमरीकी-रूस के बीच बढ़ा तनाव

एनुअल रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट में डिफेंस इंटेलिजेंस सर्विसेज ने कहा, 'रूस, अमरीका व चाइना के बीच ताकत प्रदर्शन की जंग आकार ले रही है, जिससे आर्कटिक क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है.'

चीन जो कि खुद को 'आर्कटिक स्टेट' के करीब बताता है, इस क्षेत्र में उपस्थित संसाधनों तक पहुंच व उत्तरी सागर रूट के जरिए तेज व्यापार की महत्वाकांक्षा रखता है. पेइचिंग ने 2017 में आर्कटिक सागर रूट को बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिव में शामिल किया था.

 

चीन ने पिछले कुछ वर्षों में आर्कटिक रिसर्च में तेजी से निवेश बढ़ाया है, लेकिन डिफेंस इंटेलिजेंस सर्विस के चीफ लार्स फिंडसेन ने शुक्रवार को बोला कि चाइना का रिसर्च सिर्फ साइटिंफिक नहीं है, इसका दोहरा उद्देश्य है. उन्होंने कहा, 'हम देख रहे हैं कि चीनी सेना इसमें बहुत ज्यादा दिलचस्पी दिखा रही है.'