कर्मचारियों को निकाले जाने के बाद हांगकांग पर भड़का ताइवान

कर्मचारियों को निकाले जाने के बाद हांगकांग पर भड़का ताइवान

 चीन का सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत गुआंगडॉन्‍ग भी अब कोरोना महामारी की चपेट में आ चुका है। यहां पर वायरस का डेल्‍टा वेरिएंट मिलने के बाद से मामलों में तेजी देखी गई है। इसके मद्देनजर यहां पर पूरी तरह से पांबदी लगा दी गई है और लोगों की टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। इसके लिए हर शहर में व्‍यवस्‍था की गई है। आपको बता दें कि डेल्‍टा वेरिएंट अब तक दुनिया के 70 से अधिक देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा चुका है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने इसके प्रति पूरी दुनिया को आगाह करते हुए इसको पहले वाले सभी स्‍ट्रेन की तुलना में अधिक घातक बताया है। ब्रिटेन में इस वायरस के चलते नए मामले काफी बढ़ चुके हैं। अमेरिका में भी इसके कई मामले सामने आ चुके हैं।

गुआंगडॉन्‍ग के प्रशासन ने लोगों से बिना किसी जरूरी काम के घर से बाहर निकलने को मना किया है। घर से बाहर निकलने वालों को 48 घंटों के अंदर अपनी नेगेटिव रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यहां पर 21 मई से अब तक 168 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें भी करीब 90 फीसद मामले इस प्रांत की राजधानी गुआंगझो में ही सामने आए हं। हालांकि दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले चीन में सामने आए मामलों की संख्‍या काफी कम है।

चीन के उत्‍तर पूर्वी क्षेत्र में दिसंबर 2020-जनवरी 2021 के बीच 1150 मामले सामने आए थे। तब के बाद से अब पहली बार कोरोना संक्रमण के इतने मामले सामने आए हैं। आपको बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत दिसंबर 2019 के मध्‍य में चीन के वुहांग शहर से ही हुई थी। हालांकि, चीन अब एक रिपोर्ट के आधार पर कह रहा है कि चीन में इसका पहला मामला सामने आने से पहले ही इसके सात मामले अमेरिका के पांच राज्‍यों से सामने आ चुके थे।

कोरोना उत्‍पत्ति को लेकर विश्‍व के कई बड़े देश लगातार चीन पर अंगुली उठा रहे हैं। अमेरिका का कहना है इसकी निष्‍पक्ष जांच होनी जरूरी है। ऐसा इसलिए, क्‍योंकि उसके पास इस बात के पुख्‍ता सुबूत हैं कि इसकी उत्‍पत्ति में चीन की वुहान लैब शामिल है। वहीं कई अन्‍य देश भी अमेरिका के इस बयान का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, चीन का कहना है कि क्‍योंकि अमेरिकी रिपोर्ट में ये खुलासा किया गया है कि दिसंबर 2019 की शुरुआत में ही इसके मामले यूएस में सामने आ चुके थे, लिहाजा अब जांच अमेरिका पर केंद्रित होनी चाहिए।

गुआंगडॉन्‍ग प्रांत देश का एक मैन्युफैक्चरिंग हब भी है। इसलिए यहां पर काफी संख्‍या में बाहर से भी लोग आते हैं और कार्गो भी काफी आते हैं। प्रशासन ने ताजा हालातों के मद्देनजर कहा है कि वो किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं ले सकते हैं। प्रशासन का ये भी कहना है कि बीते दो दिनों से गुआंगडॉन्‍ग की राजधानी में कोई नया मामला सामने नहीं आया है, लेकिन दूसरी जगहों पर लगातार मामले सामने आ रहे हैं।

चीन के विशेषज्ञों का कहना है कि गुआंगझू वायरस के डेल्‍टा वेरिएंट से जूझ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये दूसरे राज्‍यों और शहरों में भी हालात खराब कर सकता है। नेशनल हेल्‍थ कमीशन का कहना है कि चीन की मुख्‍यभूमि पर कोरोना के करीब 17 नए मामले सामने आए हैं। हालांकि, ये मामले रविवार को सामने आए 23 मामलों से कम हैं। यहां पर डॉन्‍गगुआन में लोकल इन्फेक्शन का एक मामला सामने आया है, जबकि अन्‍य मामले बाहर से सामने आए हैं। चीन में अब तक कोरोना संक्रमण के कुल मामले 91604 सामने आ चुके हैं, जबकि 4636 मौत हो चुकी हैं।


संकट में PM इमरान, पाकिस्‍तान में मिला खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर का ठिकाना

संकट में PM इमरान, पाकिस्‍तान में मिला खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर का ठिकाना

आतंकवाद को लेकर एक बार फ‍िर पाकिस्‍तान बेनकाब हुआ है। एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट से बचने की लगातार कोशिश में जुटे पाक की एक बार फिर से पोल खुल गई है। दुनिया की आंख में धूल झोंक रहे पाकिस्‍तान की कलई खुल गई है। पाकिस्‍तान आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान में ही छिपा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मसूद अजहर पाकिस्तान के बहावलपुर में रहता है, जिसकी सुरक्षा में पाकिस्तान के सुरक्षाबल तैनात रहते हैं। इससे एक बार फिर से यह सिद्ध हो गया है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पनाहगाह है। आतंकवादियों के लिए पाकिस्‍तान की धरती स्‍वर्ग बनी हुई है।

तंग पाक के लिए ग्रे लिस्ट से निकलना अब मुश्किल

इस खुलासे के बाद पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पाकिस्‍तान के एफएटीएफ से बाहर निकलने की उम्‍मीदों पर पानी फ‍िर गया है। दुनिया के सामने अब यह सिद्ध हो गया है कि पाकिस्‍तान आतंकवाद पर कार्रवाई करने के बजाए उसका पालन-पोषण करता है। उसने अंतरराष्‍ट्रीय आतंकी अजहर को अपने ही घर में छ‍िपा रखा है। पाकिस्‍तान कई बार एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट से बाहर निकलने की कोशिश में जुटा है। ऐसे में यह खबर उसके लिए कतई शुभ नहीं हो सकती है। ग्रे लिस्‍ट से बाहर निकलने की पाकिस्‍तान की छटपटाहट यूं ही नहीं है। कंगाल हो चुके पाकिस्‍तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ग्रे लिस्‍ट में शामिल होने के कारण उसे करीब 38 अरब डॉलर यानी 27,52,76,18,00,000 रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।

पाकिस्‍तान में अजहर के दो ठिकाने

एक रिपार्ट में कहा गया है कि आतंकवादी अजहर पाकिस्तान के बहावलपुर में सुरक्षित है। उसका एक ठिकाना बहावलपुर में उस्मान-ओ-अली मस्जिद के पास और दूसरा अड्डा जामिया मस्जिद, सुभान अल्लाह में है। अजहर के घर के रखवाली की जिम्‍मेदारी पाकिस्‍तान की है। अजहर के घर की सुरक्षा में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। आतंकवादी के आवास के आसपास बैरिकेडिंग की गई है। भारत का सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान सरकार के नाक के नीचे पूरे इंतजाम के साथ रह रहा है।


अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर यह मामला उठाएगा भारत

इस खुलासे के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने रविवार को कहा कि इस खुलासे के बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई को और बल मिलेगा। केंद्र सरकार इस मामले को वैश्विक मंच पर जोरशोर से उठाएगी। उधर, भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने कहा कि इस खुलासे ने पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है। आखिरकार इमरान खान का सच सभी के सामने आ गया है। उन्होंने भी इस मुद्दे को दूसरे देशों के सामने संयुक्त राष्ट्र में उठाने की मांग की।

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना

इस आतंकी संगठन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जम्मू और कश्मीर की घाटी में हिंसा फैलाना है। जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान का एक (जिहादी) आतंकी संगठन है, जिसका प्रमुख उद्देश्य भारत से कश्मीर को अलग करना है। इसके अलावा यह संगठन पश्चिमी देशों में भी आतंक फैलाने का काम करता है।
इस संगठन की स्थापना पाकिस्तान के पंजाब के मौलाना मसूद अजहर ने साल 2000 के मार्च महीने में की थी। 1999 में कंधार विमान अपहरण में भी इसी संगठन के नेता मौलाना मसूद अज़हर को छुड़ाने के लिए किया गया था। इसके बाद अजहर ने इस आतंकी संगठन की नींव रखी।
इस आतंकी संगठन में हरकत-उल-अंसार और हरकत-उल-मुजाहिदीन के कई आतंकी शामिल हैं। इस संगठन का मुखिया मौलाना मसूद अज़हर खुद भी हरकत-उल-अंसार का महासचिव रह चुका था।
इस संगठन को भारत में हुए कई आतंकी हमलों का जिम्मेदार माना जाता है। साल 2002 जनवरी में पाकिस्तान ने भी इसे आतंकी संगठन बताकर बैन कर दिया था इसके बाद इस संगठन ने अपना नाम बदलकर खुद्दाम उल-इस्लाम कर लिया था। यह संगठन भारत, अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा जारी आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल है। इस अपहरण कांड में भारत ने अजहर के साथ दो और आतंकी संगठन के मुखिया को छोड़ा था।
जेके के पुलवामा में एक आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे, जबकि 40 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हमला श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोर के पास गोरीपोरा में हुआ। इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है।