पाकिस्तान में नए सिरे से जनगणना और आवास होगी गणना, देश की कुल आबादी हुई इतनी

पाकिस्तान में नए सिरे से जनगणना और आवास  होगी गणना, देश की कुल आबादी हुई इतनी

 पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध बेहतरीन पद्धतियों से देश में नए सिर से जनगणना और आवास गणना कराने का फैसला किया है। पाकिस्तान सरकार ने यह फैसला वर्ष 2017 में हुई जनगणना के नतीजों में उत्पन्न विसंगति के मद्देनजर किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में समान हित

परिषद (सीसीआई) की 49वीं बैठक हुई जिसमें सातवीं जनगणना और आवास गणना कराने और 'जनगणना निगरानी समिति' का गठन करने का फैसला किया गया। बयान के मुताबिक जनगणना सलाहकार समिति की सिफारिश के आधार पर सीसीआई ने बेहतरीन अंतर्राष्ट्रीय पद्धतियों, डिजिटल तकनीक और जीआईएस निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल कर जनगणना कराने का फैसला किया। बैठक में बताया गया कि जनगणना से पहले आवासों की गणना की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 के बाद देश में वर्ष 2017 में जनगणना कराई गई थी, लेकिन इसके नतीजों को लेकर उत्पन्न विवाद की वजह से उसे कभी आधिकारिक रूप से साझा नहीं किया गया। कई समूह देश में नए सिरे से जनगणना कराने की मांग कर रहे थे। वर्ष 2017 की जनगणना के मुताबिक देश की कुल आबादी 20.78 करोड़ थी जबकि वार्षिक वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत बताई गई थी।


भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

इस्लामाबाद फिर दो दिलों को मिलाने का जरिया बना है। इस बार कॉरिडोर के कारण 74 साल बाद दो बिछड़े भाइयों की मुलाकात हुई है। ये दोनों भाई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कारण एक दूसरे से अलग हो गए थे। दोनों भाईयों को पहचान मुहम्मद सिद्दीक और भारत में रहने वाले उनके भाई हबीब उर्फ शेला के नाम से हुई है।

74 साल बाद भरी आंखों के साथ मिले दोनों भाई पाकिस्तानी मीडिया एआरवॉय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल के मुहम्मद सिद्दीक पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वे बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके भाई हबीब उर्फ शेला भारत के पंजाब में रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और वे भावुक होकर गले मिले।

सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर इन दोनों भाइयों के मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ करतारपुर कॉरिडोर में दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक दूसरे को भावुक होकर गले लगाते नजर आए। इस वीडियो में परिवार के अलावा गुरुद्वारा प्रबंधन के अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।

पहले भी मिल चुके हैं दो दोस्त इससे पहले पिछले साल भी करतारपुर कॉरिडोर में दो बिछड़े दोस्त 74 साल बाद मिल पाए थे। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जानिए भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से पाक सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है। करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। यह सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था। ऐसे में सिख धर्म में इस गुरुद्वारे के दर्शन का का बहुत अधिक महत्व है।