संसद के अंदर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने की जमकर सरकार की आलोचना, जानिए

संसद के अंदर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने की जमकर सरकार की आलोचना, जानिए

जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटे हुए चार महीने सारे हो गए हैं. लेकिन पाक का दर्द अभी भी छलक रहा है. यही कारण है कि पाक में सियासी हुकमरान कश्मीर मामले पर खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं व आपस में ही उलझे हुए हैं. सत्तापक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं.

पाकिस्तान की संसद की कार्रवाई में भी कश्मीर मामले को लेकर बेहद तनावपूर्ण बहस देखने को मिल रहा है. जहां सत्ता पक्ष कश्मीर मामले पर अपनी कामयाबी का बखान करते हुए सफाई देता फिर रहा है तो वहीं विपक्ष इमरान सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है.

बुधवार को पाक की संसद में सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच कश्मीर मामले पर बहस के दौरान जमकर तकरार हुई. पाक में चल रहे मौजूदा संसद सत्र के पहले ही दिन विपक्ष ने आरोप लगाया कि इमरान सरकार ने कश्मीर मुद्दे को संसार के सामने अच्छा से नहीं रखा, जो कि सरकार की नाकामी है.

पाकिस्तान को OIC से खींच लेना चाहिए हाथ: विपक्ष

संसद के अंदर चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने जमकर सरकार की आलोचना की. इस बीच विपक्ष ने सरकार से कूटनीतिक आपातकाल घोषित करने की मांग कर डाली.

विपक्ष ने बोला कि जब संसार के किसी भी मंच पर हमारी कोई नहीं सुनता है, तो हमें इस्लामिक राष्ट्रों के संगठन (OIC) से अलग हो जाना चाहिए. संसद के अंदर विपक्षी सांसदों के उग्र तेवर को देखते हुए पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सफाई दी व बोला कि सरकार ने जो किया वह बेहतर किया है.

कुरैशी ने अनुरोध करते हुए बोला कि आप (विपक्ष) सरकार के प्रयासों को निर्बल करने की प्रयास न करें. क्योंकि जब पाक की कोशिशें निर्बल होती हैं तो आप भी निर्बल होते हैं. साथ ही संसार के मंच पर पाक का पक्ष भी निर्बल होता है. उन्होंने बोला कि आप सुझाव दें व सरकार की ताकत बढ़ाएं.

मरा हुआ एक मंच है OIC: अहसन इकबाल

पाकिस्तान की संसद में बहस के दौरान इस कदम मुद्दा बिगड़ता चला गया कि विपक्ष नेता सरकार पर हावी हो गए. संसद में मुत्तहिदा-मजलिसे-अमल के सांसद मुनीर ओरकजई ने अपने गुस्से का इजहार करते हुए बोला कि इमरान सरकार में कश्मीर मुद्दे पर जो भी हुआ वो कोई सोच भी नहीं सकता था कभी. पिछले 72 वर्षों में कभी ऐसा नहीं हुआ.

उन्होंने बोला कि हमने OIC का दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई मदद नहीं मिली. OIC ने एक बार फिर मीटिंग नहीं बुलाई. हमारी किसी समस्या को सुनती नहीं है. ऐसे में हमें (पाकिस्तान) को फौरन इससे अलग हो जाना चाहिए. पाक को ऐसे मरे हुए मंच का मेम्बर बने रहने से कोई लाभ नहीं है.

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भी अपनी बात रखते हुए बोला कि सरकार को कम-से-कम OIC के विदेश मंत्रियों की मीटिंग बुलानी चाहिए थी.

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता अहसान इकबाल ने बोला कि जिस तरह से प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री ने इतने विदेश दौरे किए, राजदूतों को भेजा उसे देखते हुए सरकार को अब तक कूटनीतिक इमरजेंसी का एलान कर देना चाहिए था. उन्होंने बोला कि पाक एक परमाणु संपन्न देश है तो फिर क्यों बेबस है?