पूर्वी चीन सागर में पूरे लाव-लश्कर के साथ चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर ने लगाई गश्त

पूर्वी चीन सागर में पूरे लाव-लश्कर के साथ चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर ने लगाई गश्त

जापान के साथ जारी सीमा टकराव के बीच चाइना के लियाओनिंग कैरियर हड़ताल ग्रुप ने पूर्वी चीन सागर में गश्त लगाई है. पांच जंगी जहाजों के साथ पहुंचे लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर रविवार को ओकिनावा के दक्षिण-पश्चिम में मियाको स्ट्रेट से होकर गुजरा. जिसके बाद से जापान ने भी अपनी नौसेना और वायुसेना को अलर्ट पर कर दिया है. दोनों राष्ट्रों के बीच इसी इलाके में द्वीपों को लेकर तनाव है. चीनी कोस्ट गार्ड के जहाज अक्सर उन द्वीपों के पास तक आते हैं, हालांकि जापानी नौसेना की चेतावनी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ता है. लेकिन, इस बार जापान के एकदम समीप तक चाइना के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर के पहुंचने को सामरिक मामलों के जानकार भी बड़ी घटना बता रहे हैं. दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि इस इलाके में जापान अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के साथ लगातार युद्धाभ्यास कर रहा है, इसलिए ही चाइना ने चिढ़ते हुए अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को पूर्वी चीन सागर में तैनात किया है. चाइना के इस कैरियर हड़ताल ग्रुप में फ्रिगेट, डिस्ट्रायर, माइन स्वीपर और कॉम्बेट सपोर्ट शिप शामिल हैं. जापान सेल्फ डिफेंस फोर्स ने स्वयं इस घुसपैठ की रिपोर्ट को जारी किया है. चाइना का लियाओनिंग एयक्राफ्ट कैरियर 315 मीटर लंबा, 75 मीटर चौड़ा है. यह समुद्र में 31 नॉटिकल मील की गति से चल सकता है. इस युद्धपोत में 24 J-15 फाइटर्स के साथ साथ 12 एंटी- सबमरीन हैलिकॉप्टर्स तैनात हैं.

जापान के साथ जारी सीमा टकराव के बीच चाइना के लियाओनिंग कैरियर हड़ताल ग्रुप ने पूर्वी चीन सागर में गश्त लगाई है. पांच जंगी जहाजों के साथ पहुंचे लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर रविवार को ओकिनावा के दक्षिण-पश्चिम में मियाको स्ट्रेट से होकर गुजरा. जिसके बाद से जापान ने भी अपनी नौसेना और वायुसेना को अलर्ट पर कर दिया है. दोनों राष्ट्रों के बीच इसी इलाके में द्वीपों को लेकर तनाव है.



जापान के साथ जारी सीमा टकराव के बीच चाइना के लियाओनिंग कैरियर हड़ताल ग्रुप ने पूर्वी चीन सागर में गश्त लगाई है. पांच जंगी जहाजों के साथ पहुंचे लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर रविवार को ओकिनावा के दक्षिण-पश्चिम में मियाको स्ट्रेट से होकर गुजरा. जिसके बाद से जापान ने भी अपनी नौसेना और वायुसेना को अलर्ट पर कर दिया है. दोनों राष्ट्रों के बीच इसी इलाके में द्वीपों को लेकर तनाव है. चीनी कोस्ट गार्ड के जहाज अक्सर उन द्वीपों के पास तक आते हैं, हालांकि जापानी नौसेना की चेतावनी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ता है. लेकिन, इस बार जापान के एकदम समीप तक चाइना के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर के पहुंचने को सामरिक मामलों के जानकार भी बड़ी घटना बता रहे हैं. दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि इस इलाके में जापान अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के साथ लगातार युद्धाभ्यास कर रहा है, इसलिए ही चाइना ने चिढ़ते हुए अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को पूर्वी चीन सागर में तैनात किया है. चाइना के इस कैरियर हड़ताल ग्रुप में फ्रिगेट, डिस्ट्रायर, माइन स्वीपर और कॉम्बेट सपोर्ट शिप शामिल हैं. जापान सेल्फ डिफेंस फोर्स ने स्वयं इस घुसपैठ की रिपोर्ट को जारी किया है. चाइना का लियाओनिंग एयक्राफ्ट कैरियर 315 मीटर लंबा, 75 मीटर चौड़ा है. यह समुद्र में 31 नॉटिकल मील की गति से चल सकता है. इस युद्धपोत में 24 J-15 फाइटर्स के साथ साथ 12 एंटी- सबमरीन हैलिकॉप्टर्स तैनात हैं.



डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और माइन स्वीपर युद्धपोत भी थे साथ

जापानी सेना के अनुसार, चाइना के लियाओनिंग कैरियर हड़ताल ग्रुप में दो की संख्या में 052D लुयांग क्लास के डिस्ट्रॉयर, 1 टाइप 055 रेनहाई क्लास का मिसाइल डिस्ट्रॉयर, 1 टाइप 054A जियांगकाई क्लास सेकेंड फ्रिगेट और एक टाइप 901 Fuyu क्लास का फॉस्ट कॉम्बेट सपोर्ट शिप शामिल था. इसके अतिरिक्त जापान सेल्फ डिफेंस फोर्स ने मियाको स्ट्रेट के ऊपर चाइना के एक शानक्सी Y-9 पेट्रोलिंग एयरक्राफ्ट की उड़ान का भी पता लगाया है. चाइना ने वाई-9 जहाज को कई तरह की भूमिकाओं के लिए कॉन्फिगर किया हुआ है. वे आम तौर पर इलेक्ट्रॉनिक सर्विलॉन्स और मैरिटाइम पेट्रोल के कार्य आते हैं. इस तरह के विमान समुद्री युद्धपोतों के प्रतिक्रिया की नज़र कर सकते हैं. पिछले कुछ वर्ष में जापान ने कई मौकों पर अपनी क्षेत्रीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ाई है. मियाको स्ट्रेट के जरिए जापान के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (exclusive economic zone) से होते हुए जहाज अंतर्राष्ट्रीय जल मार्ग में प्रवेश करते हैं. कई वर्ष बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि चाइना ने जापान के इतने करीब अपने जंगी जहाजों को भेजा है.



जापान पर कूटनीतिक दबाव बनाना चाहता है चीन

द डिप्लोमैट से बात करते हुए अमेरिका के चीनी सुरक्षा मामलों के एक जानकार बेन लॉसन ने बोला कि चीनी रणनीतिकार इस समुद्री मार्ग को उसके विरूद्ध बनाई जा रही फर्स्ट आईलैंड चेन की काट के रूप में जरूरी मानते हैं. एयरक्राप्ट कैरियर लियाओनिंग का यह गश्त अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार ठीक है, लेकिन पेइचिंग खुले समुद्र में अपने इंट्रीग्रेटेड कैरियर हड़ताल ग्रुप को तैनात कर आक्रामक नीति का इजहार कर रहा है. लियाओनिंग ने अप्रैल 2020 में में भी अपने कैरियर हड़ताल ग्रुप के साथ इसी स्थान से होकर गुजर चुका है. उस समय अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर्स यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और यूएसएस रोनाल्ड रीगन कोविड-19 के कहर से परेशान थे, इसलिए उन्होंने चाइना की इस हरकत पर समीप में होने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही चाइना साउथ चाइना सी में आक्रामक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. यही कारण है कि हाल के दिनों में ताइवान, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई और फिलिपींस के साथ उसका टकराव बढ़ गया है.



द्वीपों को लेकर जापान से भिड़ा चीन

चीन और जापान में पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर आपस में टकराव है. दोनों देश इन निर्जन द्वीपों पर अपना दावा करते हैं. जिन्हें जापान में सेनकाकु और चाइना में डियाओस के नाम से जाना जाता है. इन द्वीपों का प्रशासन 1972 से जापान के हाथों में है. वहीं, चाइना का दावा है कि ये द्वीप उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं और जापान को अपना दावा छोड़ देना चाहिए. इतना ही नहीं चाइना की कम्यूनिस्ट पार्टी तो इसपर कब्जे के लिए सैन्य कार्रवाई तक की धमकी दे चुकी है. सेनकाकू या डियाओस द्वीपों की रखवाली वर्तमान समय में जापानी नौसेना करती है. ऐसी स्थिति में यदि चाइना इन द्वीपों पर अतिक्रमण करने की प्रयास करता है तो उसे जापान से युद्ध लड़ना होगा. हालांकि दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी सैन्य ताकत वाले चाइना के लिए ऐसा करना सरल नहीं होगा. पिछले सप्ताह भी चीनी सरकार के कई जहाज इस द्वीप के समीप पहुंच गए थे जिसके बाद विवाद की संभावना भी बढ़ गई थी.



चीन समुद्र में चला रहा पावर गेम

साउथ चाइना सी में 'जबरन कब्‍जा' तेज कर दिया है. पिछले वर्ष चाइना ने साउथ चाइना सी की 80 जगहों का नाम बदल दिया. इनमें से 25 आइलैंड्स और रीफ्स हैं, जबकि बाकी 55 समुद्र के नीचे के भौगोलिक स्‍ट्रक्‍चर हैं. यह चाइना का समुद्र के उन हिस्‍सों पर कब्‍जे का संकेत है जो 9-डैश लाइन से कवर्ड हैं. यह लाइन इंटरनैशनल लॉ के मुताबिक, अवैध मानी जाती है. चाइना के इस कदम से ना केवल उसके छोटे पड़ोसी देशों, बल्कि हिंदुस्तान और अमेरिका की टेंशन भी बढ़ गई है. चाइना से खतरे को देखते हुए जापान ने न केवल पूर्वी चीन सागर और प्रशांत महासागर बल्कि हिंद महासागर में भी अपनी ऑपरेशनल गतिविधियों को बढ़ाया है. जापानी की नौसेना हिंदुस्तान के साथ मिलकर युद्धाभ्यास कर रही हैं. इसका मकसद न केवल आपसी तालमेल को बढ़ाना है बल्कि हिंद महासागर से चाइना को अलग-थलग करना भी है. वहीं, इसमें हिंदुस्तान और जापान का अमेरिका खुलकर साथ दे रहा है.



एशिया में किन-किन राष्ट्रों को चाइना से खतरा

एशिया में चाइना की विस्तारवादी नीतियों से हिंदुस्तान को सबसे अधिक खतरा है. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण लद्दाख में चीनी फौज के जमावड़े से मिल रहा है. इसके अतिरिक्त चाइना और जापान में भी पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों को लेकर तनाव चरम पर है. हाल में ही जापान ने एक चीनी पनडुब्बी को अपने जलक्षेत्र से खदेड़ा था. चाइना कई बार ताइवान पर भी खुलेआम सेना के इस्तेमाल की धमकी दे चुका है. इन दिनों चीनी फाइटर जेट्स ने भी कई बार ताइवान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है. वहीं चाइना का फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया के साथ भी टकराव है. चाइना के विरूद्ध अमेरिका एशिया में अपनी फौज को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. चाइना के आक्रामक रवैये की आलोचना करते हुए यूएस बोला कि हम हिंदुस्तान और अपने मित्र राष्ट्रों को चाइना से खतरे के मद्देनजर अपने सैनिकों की तैनाती की समीक्षा कर रहे हैं. चाइना को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए अमेरिका ने बोला कि आवश्यकता पड़ी तो अमेरिकी सेना चाइना की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से मुकाबला करने को तैयार है.


अमेरिका-ईरान के बीच अगले सप्ताह शुरू होगी वार्ता, परमाणु समझौते का मुख्य बिंदु

अमेरिका-ईरान के बीच अगले सप्ताह शुरू होगी वार्ता, परमाणु समझौते का मुख्य बिंदु

रान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता अगले सप्ताह शुरू होगी। अमेरिका के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस सप्ताह यूरोपियन यूनियन, चीन और रूस के साथ हुई वार्ता के बाद इस संबंध में कुछ प्रगति हुई है।

ज्ञात हो कि 2015 के परमाणु समझौते पर लौटने के लिए अमेरिका द्वारा वार्ता शुरू की गई है। इससे पहले ईरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस सप्ताह जो वार्ता हुई है। उसके कुछ सार्थक परिणाम आए हैं। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह वियना में अप्रत्यक्ष रूप से वार्ता शुरू हो जाएगी। हालांकि इस वार्ता में अभी और अधिक आगे बढ़ने की जरूरत है।

उक्त अधिकारी का कहना है कि ईरान अपने दायित्वों का पालन करता है, तो हम भी प्रतिबंध हटाने को तैयार हैं। ऐसा नहीं है कि सभी प्रतिबंध तर्क संगत नहीं हैं। कुछ ऐसे भी प्रतिबंध हैं तो वैध प्रतिबंध हैं। ईरान को इन सारी स्थितियों को समझना होगा। अधिकारी के अनुसार वार्ता के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया गया है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह वियना में वार्ता बेहतर माहौल में आगे बढ़ेगी।


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