अमेरिका और EU के खिलाफ एकजुट हुए चीन और रूस, बढ़ सकता है तनाव

अमेरिका और EU के खिलाफ एकजुट हुए चीन और रूस, बढ़ सकता है तनाव

अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के खिलाफ जिस तरह से चीन और रूस ने एकजुटता दिखाई है, उससे दुनिया में एक बार फ‍िर महाशक्तियों का ध्रुवीकरण की आशंका प्रबल हो गई है। चीन और रूस के विदेश मंत्रियों की मुलाकात में दोनों नेताओं ने कहा कि अमेरिका लगातार आतंरिक मामलों में दखल दे रहा है। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद अंतरराष्‍ट्रीय राजनीति तेज हो गई है। दोनों देशों की निकटता के चलते इस बात की आशंका भी प्रबल हो गई है कि एक बार फ‍िर दुनिया एक नए शीत युद्ध की ओर बढ़ रही है। चीन और रूस के इस गठबंधन ने टकराव को और बढ़ा दिया है। चीन और अमेरिका के बीच दक्षिण चीन सागर, हिंद प्रशांत सागर, हांगकांग और ताइवान पर यह टकराव और बढ़ेगा। 

चीन और रूस के विदेश मंत्रियों की मुलाकात

अमेरिका और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए चीन और रूस के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को मुलाकात की और कहा कि आंतरिक मामलों में दखल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देश जलवायु परिवर्तन और कोरोना महामारी जैसे मसलों पर वैश्विक प्रगति के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। चीन और रूस ने यह एकजुटता ऐसे समय दिखाई है, जब पश्चिम ने मानवाधिकारों को लेकर उनके खिलाफ नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। 


चीन ने अमेरिका पर आतंरिक मामलों पर लगाया हस्‍तक्षेप का आरोप

चीनी विदेश मंत्री वांग यी और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव की यह मुलाकात दक्षिणी चीन के नाननींग शहर में हुई। वांग और सर्गेई ने अमेरिका पर दूसरे देशों के आतंरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया। वांग ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान शिनजियांग में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर चीनी अधिकारियों के खिलाफ यूरोपीय यूनियन, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा, 'सभी प्रकार के एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ देशों को एकजुट होना चाहिए।' जबकि सर्गेई ने कहा कि प्रतिबंधों के चलते रूस और चीन करीब आ गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वे अपने नियम हर किसी पर थोप रहे हैं। 


इस कारण हैं प्रतिबंध

हांगकांग में नए सुरक्षा कानून और शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार और जासूसी को लेकर अमेरिका ने चीन की कई कंपनियों और सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों पर पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है। जबकि क्रीमिया पर कब्जे, यूक्रेन में अलगाववादियों का समर्थन करने और आलोचकों पर हमले को लेकर रूस वर्षो से पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना रहा है।


अमेरिका-ईरान के बीच अगले सप्ताह शुरू होगी वार्ता, परमाणु समझौते का मुख्य बिंदु

अमेरिका-ईरान के बीच अगले सप्ताह शुरू होगी वार्ता, परमाणु समझौते का मुख्य बिंदु

रान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता अगले सप्ताह शुरू होगी। अमेरिका के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस सप्ताह यूरोपियन यूनियन, चीन और रूस के साथ हुई वार्ता के बाद इस संबंध में कुछ प्रगति हुई है।

ज्ञात हो कि 2015 के परमाणु समझौते पर लौटने के लिए अमेरिका द्वारा वार्ता शुरू की गई है। इससे पहले ईरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस सप्ताह जो वार्ता हुई है। उसके कुछ सार्थक परिणाम आए हैं। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह वियना में अप्रत्यक्ष रूप से वार्ता शुरू हो जाएगी। हालांकि इस वार्ता में अभी और अधिक आगे बढ़ने की जरूरत है।

उक्त अधिकारी का कहना है कि ईरान अपने दायित्वों का पालन करता है, तो हम भी प्रतिबंध हटाने को तैयार हैं। ऐसा नहीं है कि सभी प्रतिबंध तर्क संगत नहीं हैं। कुछ ऐसे भी प्रतिबंध हैं तो वैध प्रतिबंध हैं। ईरान को इन सारी स्थितियों को समझना होगा। अधिकारी के अनुसार वार्ता के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया गया है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह वियना में वार्ता बेहतर माहौल में आगे बढ़ेगी।


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