तालिबान राज में खामोश हो गया अफगान संगीत, दहशत में कलाकार सुरक्षित स्थानों पर ले रहे पनाह

तालिबान राज में खामोश हो गया अफगान संगीत, दहशत में कलाकार सुरक्षित स्थानों पर ले रहे पनाह

अफगानिस्तान में तालिबान राज में एक बार फिर अफगानी संगीत खामोश हो गया है। होटलों, शादियों और चलते वाहनों में बजने वाला संगीत अब थम गया है। संगीत की महफिलें बीते दौर की यादें बनकर रह गई हैं। संगीत के कलाकार दहशत में हैं और रोक लगने से पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पनाह ले रहे हैं।

तालिबान सरकार ने हालांकि अभी संगीत को लेकर कोई फरमान नहीं जारी किया है, लेकिन अफगानी लोग तालिबान की फितरत से उसके अगले कदम का अंदाज लगाने लगे हैं। यही कारण है कि लोग दहशत में हैं। एक संगीतकार ने बताया कि वह संगीत के उपकरण लेकर काबुल की एक चौकी से गुजर रहा था, तालिबान ने उसके उपकरण तोड़ दिए। अफगान शास्त्रीय संगीत के उस्ताद रहीम बख्श के 21 वर्षीय बेटे मुजफ्फर बख्श ने बताया कि हालात जुल्म-ज्यादती वाले हैं।

तालिबान के एक प्रवक्ता बिलाल करीमी से जब पूछा गया कि क्या सरकार संगीत पर प्रतिबंध लगाएगी? प्रवक्ता ने बताया कि अभी इसकी समीक्षा की जा रही है। कोई अंतिम निर्णय होने के बाद इसकी घोषणा की जाएगी। अफगानिस्तान में शादियों में अब संगीत न के बराबर हो गया है। यहां कई कराओके पार्लर खुले हुए थे, जो अब बंद हो गए हैं। हाइवे पर जाने वाले ट्रकों के चालक भी तालिबान की चेकपोस्ट आने पर संगीत को बंद कर देते हैं।

अफगानिस्तान की संगीत परंपरा ईरानी और भारतीय शास्त्रीय संगीत से प्रभावित है। इसमें पाप संगीत भी है, जिसमें इलेक्ट्रानिक इंस्ट्रूमेंट और डांस बीट्स भी शामिल है। दोनों पिछले 20 वर्षों में काफी फले-फूले हैं। आमतौर पर वेडिंग हाल में संगीत और नृत्य का आयोजन होता हैं। इस दौरान पुरुषों और महिलाओं का सेक्शन अलग-अलग होता है। तालिबान ने अब तक संगीत पर आपत्ति नहीं जताई है, लेकिन उनकी मौजूदगी डराने वाली है। ऐसे में संगीतकार शो से इन्कार करते हैं। शादियों के दौरान हाल में पुरुष सेक्शन में अब लाइव संगीत या डीजे देखने को नहीं मिलता। महिला वर्ग में तालिबान लड़ाकों की पहुंच कम है। ऐसे में यहां कभी-कभी डीजे बजते हैं।


छत तोड़कर बिस्तर पर जा गिरा उल्का पिंड, डर से महिला का हुआ बुरा हाल

छत तोड़कर बिस्तर पर जा गिरा उल्का पिंड, डर से महिला का हुआ बुरा हाल

आधी रात को ब्रिटिश कोलंबिया में रहने वाली रुथ हैमिल्टन की नींद हल्के धमाके की आवाज के साथ खुली। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि हुआ क्या है। छत में एक सुराग दिखाई दे रहा था। हैमिल्टन ने तुरंत आपातकालीन नंबर पर फोन कर जानकारी दी। उसके बाद उन्हें जो पता चला, वह किसी आश्चर्य से कम नहीं था। उनके बिस्तर पर ठीक उनके तकिए के पास एक उल्कापिंड गिरा था।

यह घटना तीन अक्टूबर की है। उस घटना को याद कर हैमिल्टन सिहर उठती हैं। छत में सुराग करते हुए करीब सवा किलो का उल्का पिंड उनके चेहरे से कुछ ही दूरी पर गिरा था। इसके बाद पूरी रात वह नहीं सो पाई थीं। यूनिवर्सिटी आफ वेस्टर्न ओंटारियो के प्रोफेसर पीटर ब्राउन ने पुष्टि की है कि हैमिल्टन के बिस्तर पर उल्का पिंड ही गिरा था। यह घटना इंटरनेट मीडिया पर भी वायरल हो रही है। वैसे तो हर घंटे कोई न कोई उल्का पिंड धरती की ओर आता है। इनमें से ज्यादातर पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते ही नष्ट हो जाते हैं और कुछ नीचे गिर जाते हैं। वैज्ञानिक अध्ययन के दृष्टिकोण से इन्हें अहम माना जाता है। कई बार इनकी अच्छी खासी बोली भी लगती है।


पूरा घटनाक्रम-

महिला की जान उस वक्त खतरे में आ गई, जब वह अपने बिस्‍तर पर सो रही थी। दरअसल, उसके बिस्तर पर अचानक से अंतरिक्ष (Space) से एक उल्‍कापिंड आ गिरा। गनीमत रही कि यह उल्‍कापिंड महिला से कुछ इंच की दूरी पर गिरा, जिसके चलते उसे कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इस हादसे से महिला बेहद डर गई थी। उल्‍कापिंड घर की छत में छेद करते हुए महिला के बगल में गिरा था।


गनीमत रही कि इस खौफनाक घटना में हैमिल्‍टन बाल-बाल बच गई. उसने इमरजेंसी सर्विस को फोन किया और पता लगाने की कोशिश की। ये पत्थरनुमा चीज कहां से आई थी. बाद में पता चला कि पत्थरनुमा चीज उल्‍कापिंड थी. यानी कि हैमिल्‍टन के घर पर उल्‍कापिंड गिरा था।