ईरान के सैनिकों और तालिबानी लड़ाकों के बीच बॉर्डर हुई हिंसक झड़प

ईरान के सैनिकों और तालिबानी लड़ाकों के बीच बॉर्डर हुई हिंसक झड़प

Iran and Taliban Forces Clash: ईरान के सैनिकों और तालिबानी लड़ाकों के बीच अफगानिस्तान-ईरान की सीमा (Afghanistan Iran Border) पर हिंसक झड़प हो गई. हालांकि किसी की मौत की कोई खबर नहीं है. झड़प के बाद कहा गया कि ऐसा ‘गलतफहमी’ की वजह से हुआ है. इस घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. जिसमें तालिबानी लड़ाके हथियारों के साथ दिखाई दे रहे हैं. इनके बीच गोलीबारी भी हुई है. तालिबानियों को जवाब देते हुए ईरान की तरफ से गोले दागे गए.

ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने पुष्टि करते हुए बताया है कि ये लड़ाई हिरमंद काउंटी के शाघालक गांव में हुई है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी तस्नीम एजेंसी ने कहा कि तस्करी का मुकाबला करने के लिए अफगानिस्तान के साथ लगी सीमा के पास ईरानी क्षेत्र में दीवारें खड़ी की गई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ ईरानी किसानों ने दीवारों को लांघ लिया था लेकिन वह फिर भी ईरान की सीमा के भीतर ही थे. लेकिन तालिबानी बलों ने लगा कि किसान उनके इलाके में आ गए हैं, जिसके चलते उन्होंने गोलीबारी करना शुरू कर दिया.

तालिबान के साथ बातचीत हुई

ईरान के अधिकारियों ने इस मामले में तालिबान के साथ बातचीत की है, जिसके बाद लड़ाई खत्म हो गई. बाद में बुधवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबजादेह (Saeed Khatibzadeh) ने एक बयान में तालिबान का नाम लिए बिना कहा कि ‘सीमावर्ती इलाकों में रहने वालों के बीच की गलतफहमी’ लड़ाई का कारण बनी है. एक वीडियो में कथित तौर पर तालिबान बलों को एक ईरानी क्षेत्र के अंदर देखा गया है, जिसमें दावा किया गया कि तालिबानी लड़ाको ने कई चौकियों पर कब्जा कर लिया है. हालांकि तस्नीम ने इस दावे को खारिज कर दिया है.

कब्जे की बात से ईरान का इनकार

ईरान की तरफ से बताया गया है कि सीमा क्षेत्र के वीडियो में लड़ाई के शुरुआती हिस्से दिख रहे हैं और अब देश की सीमा पर सुरक्षा बलों का पूरा नियंत्रण है. आईआरजीसी (Islamic Revolutionary Guard Corps) से जुड़ी एक अन्य न्यूज वेबसाइट में कहा गया है कि लड़ाई के कारण किसी की मौत नहीं हुई और अब यहां पूरी तरह शांति है. सिस्तान और बलूचिस्तान के गवर्नर के सुरक्षा डिप्टी मोहम्मद मराशी ने ईरानी सरकारी टेलीविजन को बताया कि झड़पें गंभीर नहीं थीं, कर्मियों या संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. तालिबान ने अगस्त में विदेशी सेना की वापसी के बाद अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था. ईरान ने तालिबान सरकार को आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी है.


भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

इस्लामाबाद फिर दो दिलों को मिलाने का जरिया बना है। इस बार कॉरिडोर के कारण 74 साल बाद दो बिछड़े भाइयों की मुलाकात हुई है। ये दोनों भाई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कारण एक दूसरे से अलग हो गए थे। दोनों भाईयों को पहचान मुहम्मद सिद्दीक और भारत में रहने वाले उनके भाई हबीब उर्फ शेला के नाम से हुई है।

74 साल बाद भरी आंखों के साथ मिले दोनों भाई पाकिस्तानी मीडिया एआरवॉय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल के मुहम्मद सिद्दीक पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वे बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके भाई हबीब उर्फ शेला भारत के पंजाब में रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और वे भावुक होकर गले मिले।

सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर इन दोनों भाइयों के मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ करतारपुर कॉरिडोर में दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक दूसरे को भावुक होकर गले लगाते नजर आए। इस वीडियो में परिवार के अलावा गुरुद्वारा प्रबंधन के अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।

पहले भी मिल चुके हैं दो दोस्त इससे पहले पिछले साल भी करतारपुर कॉरिडोर में दो बिछड़े दोस्त 74 साल बाद मिल पाए थे। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जानिए भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से पाक सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है। करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। यह सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था। ऐसे में सिख धर्म में इस गुरुद्वारे के दर्शन का का बहुत अधिक महत्व है।