भारत-बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय रिश्ते के 50 साल, शेख हसीना ने बोली ये बात

भारत-बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय रिश्ते के 50 साल, शेख हसीना ने बोली ये बात

भारत (India) की ओर से 1971 में बांग्लादेश (Bangladesh) को मान्यता देने की याद में छह दिसंबर को मनाए जा रहे ‘मैत्री दिवस’ (Maitri Diwas) के अवसर पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने कहा कि बांग्लादेश और भारत (India-Bangladesh Relations) राजनयिक संबंधों की स्थापना की स्वर्ण जयंती मना रहे हैं. ये हमारे द्विपक्षीय संबंधों की यात्रा में एक मील का पत्थर है. उन्होंने कहा कि भारत ने छह दिसंबर 1971 को बांग्लादेश को एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में मान्यता दी.

शेख हसीना ने कहा कि आज मैं पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) और उनकी सरकार की उदारता को याद करती हूं. उन्होंने बांग्लादेश के एक करोड़ शरणार्थियों को आवास मुहैया कराया. बांग्लादेश की पीएम ने कहा कि मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की बांग्लादेश यात्रा के दौरान छह दिसंबर को मैत्री दिवस के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया गया था. भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले 50 सालों से अटूट संबंध हैं. दोनों ही देशों के बीच व्यापार क्षेत्र में भी इजाफा हुआ है.

वहीं, विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला (Harsh Vardhan Shringla) ने मैत्री दिवस के मौके पर कहा कि भारत और बांग्लादेश आतंकवाद (Terrorism) और कट्टरपंथ को सहायता और समाप्त करने वाली अस्थिरकारी ताकतों का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता साझा करते हैं. उन्होंने कहा कि इंटरनेट के माध्यम से गलत सूचना (Misinformation) और दुष्प्रचार जैसी नई और उभरती चुनौतियों से निपटने में सहयोग को मजबूत करना दोनों देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है.

शेख हसीना के साथ काम करने का आकांक्षी: पीएम मोदी

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि वह भारत-बांग्लादेश के संबंधों को और विस्तार देने तथा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए पड़ोसी देश की अपनी समकक्ष शेख हसीना के साथ काम जारी रखने के आकांक्षी हैं. मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘आज भारत और बांग्लादेश मैत्री दिवस मना रहे हैं. हम अपनी 50 वर्षों की मित्रता की नींव को मिलकर याद करते हैं और मनाते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘अपने संबंधों को और विस्तार देने तथा गहरा बनाने के लिए मैं प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ मिलकर काम जारी रखने का आकांक्षी हूं.’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक ट्वीट में कहा, ‘बांग्लादेश को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दिए जाने का हम 50वां वर्ष मना रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘भारत-बांग्लादेश ‘मैत्री’, जो मुक्ति संग्राम के दौरान साझा शहादत से गढ़ी गई है, वह 50 वर्ष की यात्रा पूरी कर द्विपक्षीय संबंधों को ‘सुनहरे अध्याय’ की ओर ले जा रहा है.’ उन्होंने कहा कि इस वर्ष दोनों देश मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व में मैत्री दिवस मना रहे हैं.’

इस साल ये देश मना रहे हैं मैत्री दिवस

बांग्लादेश की मुक्ति से 10 दिन पहले भारत ने छह दिसंबर 1971 को बांग्लादेश को स्वंतत्र देश के रूप में मान्यता दे दी थी. भारत उन पहले मुल्कों में था जिन्होंने बांग्लादेश के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए. ‘मैत्री दिवस’ ढाका और दिल्ली के अलावा बेल्जियम, कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, रूस, कतर, सिंगापुर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जापान, मलेशिया, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका में मनाया जा रहा है.


भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

भारत-पाक बंटवारे में जुदा हुए दो भाई मिले 74 साल बाद, ऐसी रही दोनों की मुलाकात

इस्लामाबाद फिर दो दिलों को मिलाने का जरिया बना है। इस बार कॉरिडोर के कारण 74 साल बाद दो बिछड़े भाइयों की मुलाकात हुई है। ये दोनों भाई भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कारण एक दूसरे से अलग हो गए थे। दोनों भाईयों को पहचान मुहम्मद सिद्दीक और भारत में रहने वाले उनके भाई हबीब उर्फ शेला के नाम से हुई है।

74 साल बाद भरी आंखों के साथ मिले दोनों भाई पाकिस्तानी मीडिया एआरवॉय न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 80 साल के मुहम्मद सिद्दीक पाकिस्तान के फैसलाबाद शहर में रहते हैं। वे बंटवारे के वक्त अपने परिवार से अलग हो गए थे। उनके भाई हबीब उर्फ शेला भारत के पंजाब में रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर में इतने लंबे अरसे बाद एक दूसरे को देख दोनों की आंखें भर आई और वे भावुक होकर गले मिले।

सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर इन दोनों भाइयों के मुलाकात का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों अपने-अपने रिश्तेदारों के साथ करतारपुर कॉरिडोर में दिखाई दे रहे हैं। मुलाकात के दौरान दोनों भाई एक दूसरे को भावुक होकर गले लगाते नजर आए। इस वीडियो में परिवार के अलावा गुरुद्वारा प्रबंधन के अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।

पहले भी मिल चुके हैं दो दोस्त इससे पहले पिछले साल भी करतारपुर कॉरिडोर में दो बिछड़े दोस्त 74 साल बाद मिल पाए थे। भारत के सरदार गोपाल सिंह अपने बचपन के दोस्त अब 91 साल के मोहम्मद बशीर से 1947 में अलग हो गए थे। इस समय सरदार गोपाल सिंह की उम्र 94 साल जबकि मोहम्मद बशीर 91 साल के हो चुके हैं।

करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जानिए भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से पाक सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है। करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है। यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। यह सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था। ऐसे में सिख धर्म में इस गुरुद्वारे के दर्शन का का बहुत अधिक महत्व है।