ईर्ष्या करने से क्या-क्या हो सकते हैं आपको नुक्सान, जाने

ईर्ष्या करने से क्या-क्या हो सकते हैं आपको नुक्सान, जाने

स्वस्थ रहने के लिए आपको ईर्ष्या को मन से भगाना होगा. अगर ईर्ष्या मन से नहीं जाएगी तो मन में कई तरह के विकार पैदा हो जाएंगे. ये विकार शरीर पर भी बुरा प्रभाव डालेंगे. अगर आप किसी से ईर्ष्या करते हैं तो तुरंत इस आदत को बदल डालिए.

न करें शरीर को बेकार -
कई बार इंसान को समझ ही नहीं आता कि आखिर वह बार-बार बीमार क्यों पड़ जाता है. अगर थोड़ा गहराई से विचार करेंगे तो इसका कारण पता लग जाएगा. कई लोग स्वास्थ्य संबंधी सभी नियमों का पालन करते हैं, अच्छा खाते हैं, समय पर उठते व सोते हैं, अभ्यास करते हैं पर फिर भी बीमार रहते हैं. दरअसल बीमारी उनके मन में हैं. वे किसी न किसी इंसान से ईर्ष्या करते हैं व मन ही मन कुढ़ते हैं. इस कारण से वे खुलकर जी ही नहीं पाते व अपना शरीर भी बेकार कर लेते हैं. यह आदत बहुत लोगों को घेरे रहती है.

किसी का भला नहीं होता -
ईर्ष्या करने वाला आदमी बेहद निगेटिव होता है. वह खुद को आगे बढ़ने का संघर्ष करता नहीं है व दूसरों की प्रगति के बारे में सोचकर परेशान रहता है. ईर्ष्या के कारण कई बार मन में क्रोध भी आता है. इस कारण मन व शरीर दोनों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. आदमी ईर्ष्या करके किसी का कुछ नहीं बिगाड़ता, बस अपनी स्वास्थ्य बेकार कर लेता है. ईर्ष्या करने से किसी का भला नहीं होता. इस कारण वह कभी स्वस्थ नहीं रह पाता. कई इंसान किसी खास इंसान को देखकर खुश होने की बजाय चिढ़ने लगते हैं, हंसना बंद कर देते हैं, मन ही मन बड़बड़ाते हैं. इस सबसे स्वास्थ्य नहीं बिगड़ेगी तो व क्या होगा.

जहर घोल देती है
दूसरों की सफलता व खुशी देखकर चिढ़ने की बजाय उसमें शामिल होने का संघर्ष करना चाहिए व उससे आगे बढ़ने की प्रेरणा लेनी चाहिए. अगर ईर्ष्या मन में बसी रही तो आप अपने शरीर में बसी सकारात्मक शक्ति को खो बैठेंगे. आपके माथे पर तनाव की लकीरें ही नजर आएंगी. आप जिस भी इंसान से मिलें, उसके गुणों की तरफ देखें. सच्चे दिल से गुणों की तारीफ करें. ईर्ष्या शरीर में एक प्रकार का जहर घोल देती है. इस जहर के कारण न तो खाया-पिया शरीर के कार्य आता है व न ही मन में अच्छे विचार आते हैं. ईर्ष्या करने की बजाय लोगों को प्यार बांटिए. फिर देखिएगा स्वास्थ्य कितनी अच्छी रहेगी.