जानिए, पुरुषों में होती हैं यूरिन संबंधी समस्या ऐसे पाएं राहत

जानिए, पुरुषों में होती हैं यूरिन संबंधी समस्या ऐसे पाएं राहत

सड़क हादसे या किसी अन्य तरह की चोट के बाद पुरुषों में आकस्मित यूरिन संबंधी समस्या हुई है तो 90 प्रतिशत यूरिन स्ट्रिक्चर यानि पेशाब नली के कटने या डैमेज होना इसका कारण होता है. यूरिनरी स्ट्रिक्चर में यूरिन की नली चोट लगने पर कट जाती है व यूरिन पास नहीं होता है जिससे भीतर ही भीतर संक्रमण फैलने लगता है.

बीस सेमी। लंबी होता है यूरेथ्रा -
पुरुषों में यूरेथ्रा (पेशाब नली की लंबाई) करीब बीस सेमी। जबकि स्त्रियों में करीब चार सेमी। होती है. चोट लगने या कूल्हे की हड्डी टूटने पर यूरेथ्रा डैमेज होता है. स्ट्रिक्चर दो सेमी। तक का है तो दूरबीन से ऑपरेट कर अच्छा करते हैं. दो सेमी। से अधिक है तो बड़े ऑपरेशन से चीरा लगाकर उपचार करते हैं.

गाल की स्कीन से करते ग्राफ्टिंग -
स्ट्रिक्चर दूर करने के लिए यूरेथ्रोप्लास्टी करते हैं. इसमें रोगी के गाल के भीतर की स्कीन जिसे म्यूकोसा बोला जाता है उससे नया यूरेथ्रा बनाकर बेकार हो चुके यूरेथ्रा को निकालकर दोनों हिस्सों के बीच जोड़ते हैं. जीभ के निचले हिस्से जिसे बकल म्यूकोसा कहते हैं उस स्कीन की ग्राफ्टिंग से पेशाब की नयी नली बनाई जाती है.

गुुटखा खाने वालों में थोड़ी कठिन -
जो लोग गुटखा, पान मसाला, तंबाकू या सिगरेट पीते हैं उन्हें स्ट्रिक्चर की समस्या हुई तो उनके गाल की म्यूकोसा का प्रयोग नहीं हो पाता है. इसका कारण है पान मसाला खाने की वजह से म्यूकोसा की ऊपरी परत बेकार हो जाती है. इससे यूरेथ्रोप्लास्टी करने से संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. ऐसे में ब्लैडर के कुछ हिस्से को काटकर यूरेथ्रा बनाते हैं.

इन लक्षणों को पहचान लें -
इंजरी होने के बाद यूरिन का आकस्मित से बंद हो जाना, पेट फूलने लगना, पेशाब के रास्ते खून आना, पेट में तेज असहनीय दर्द के साथ बहुत अधिक बेचैनी व घबराहट होना इस समस्या के प्रमुख लक्षण हैं.

इमरजेंसी में ऐसे देते हैं राहत -
स्ट्रिक्चर होने पर राहत के लिए पेट में छोटा छेद कर ब्लैडर में पाइप लगाकर यूरिन पास कराते हैं. सड़क हादसे में घायल मरीज को बारह घंटे तक यूरिन पास नहीं हुआ तो एंडोस्कोप से कैथेटर डालकर यूरिन पास कराते हैं.

मरीज की ये जांचें की जाती हैं -
स्ट्रिक्चर पता करने के लिए रेट्रोग्रेड यूरेथ्रोस्कोपी जाँच करते हैं. इसमें रोगी के पेशाब के रास्ते दवा डालकर एक्स-रे करते हैं जिससे भीतर की पूरी वस्तु साफ दिखती है. कई बार अल्ट्रासाउंड जाँच से भी ब्लैडर व यूरेटर को देखते हैं. किसी कारण से दोबारा चोट लग गई तो दूरबीन से 'री-डू यूरेथ्रोप्लास्टी' तकनीक से तकलीफ अच्छा करते हैं.