जानिए, नीरा सें बनी चीनी के फायदे

जानिए, नीरा सें बनी चीनी के फायदे

नीरा पेय को आयुर्वेद में उपयुक्त माना गया है। नीरा पेय डायबिटीज के रोगी के लिए उपयुक्त है। इसी नारियल पेड़ की नीरा से चीनी बनाने का इस्तेमाल रत्नागिरी के भाटे नारियल केन्द्र ने सफलतापूर्वक किया है। इन शोधकर्ताओं के अनुसार डायबिटीज के रोगी के लिए यह चीनी उपयुक्त है।

नारियल के पेड़ के फूलों के गुच्छे से जो रस निकलता है वही नीरा है। इसमें चीनी की मात्रा सिर्फ 14 से 18 प्रतिशत रहती है। गन्ने से तैयार की गई चीनी में ग्लाईसेमिक इंडेक्स 65 रहता है, वहीं नीरा पेय में ग्लायसेमिक इंडेक्स सिर्फ 32 प्रतिशत होता है। इतना कम ग्लायसेमिक इंडेक्स होने के कारण नीरा पेय डायबिटीज रोगी के लिए लाभकारी है। कोंकण कृषि विद्यापीठ के शोधकर्ता चिकित्सक वैभव शिंदे ने इस नारियल पेड़ की नीरा से चीनी को बनाया है।

शोधकर्ता वैभव शिंदे बताते हैं कि नारियल के पेडट फूलों के गुच्छे से सूर्योदय से पहले जो रस मिलता है उसे नीरा कहते हैं। नारियल पेड़ के फूलों के गुच्छे के बीच छेद करके नीरा पेय को निकाला जाता है। इससे चीनी व मध बनाया जाता है। मानवीय स्वास्थ के लिए नीरा को उपयुक्त माना गया है। नारियल की खेती कोंकण में बड़े पैमाने पर होती है तो नीरा भी उसी मात्रा में निकाली जाती सकती है।

नीरा पेय में ग्लायसेमिक इंडेक्स सिर्फ 32 प्रतिशत होता है। जो अन्य पदार्थ में ग्लायसेमिक इंडेक्स सबसे कम होता है। नीरा की चीनी से मिठाई व मीठी चीजें बना सकते हैं जो डायबिटीज के रोगी के लिए लाभकारी साबित होंगी। भविष्य में इस नीरा से बनी चीनी की मांग बढ़ेगी। 20 से 25 वर्ष के नारियल की पेड़ को नीरा निकालने के लिए चुनें। इस एक पेड़ सें डेढ़ से 2 लीटर नीरा मिल सकती है। इस नीरा को गर्म करें व जो गाढ़ा पदार्थ बनता है। वह ठंडा होने के बाद मिश्री बनती है। उसे मिक्सर में पीसकर पावडर बनाते हैं व यही नीरा की चीनी आपके खाने के लिए तैयार होती है।

नीरा सें चीनी बनाने कि प्रक्रिया

नीरा निकालने के लिए नारियल के पेड़ के फूलों के बीच में छेद किया जाता है। इससे बहने वाला रस नीरा होता है। नारियल पेड़ के फूलों के गुच्छे मटकी बांधते हैं। छेद से बहने वाली नीरा मटकी मे गिरती है। सूर्योदय से पहले ही नीरा निकाली जाती है। सूर्योदय के बाद निकाली हुई नीरा का गुणधर्म अलग होता है। इसलिए सूर्योदय से पहले निकाला गया पेय ही नीरा है। गैस पर मिलावट गाढ़ा होने तक रखें। गैस बंद करें, फिर इसी गाढ़े मिलावट की मिश्री बनती है। उसे मिक्सर में डालने के बाद खाने के लिए चाइना तैयार होती है।

शास्त्र शुद्ध ढंग से नीरा से चीनी बनाने का प्रशिक्षण लेकर रोजगार भी उपलब्ध होगा। इस नीरा को बनाने का प्रशिक्षण लेने वाले तुषार आग्रे बताते हैं कि, 'मैंने नीरा से चीनी बनाने का प्रशिक्षण लिया है, रत्नागिरी के भाटे नारियल केन्द्र में मैंने प्रशिक्षण लिया। उसके बाद मैं नीरा से चीनी बना रहा हूं। मैं एक महीने में 100 किलो नीरा की चीनी बेचता हूं। इस एक किलो चीनी की मूल्य एक हजार रुपए है। इस चीनी को बेचने से मुझे 30 हजार रुपए का लाभ प्रति महीना होता है। अब मांग बढ़ रही है।

इस पर चिकित्सक बलवंत एकके बताते हैं कि, रेग्युलर चीनी में ग्लाईसेमिक इंडेक्स 65 है, व अगर नीरा पेय के चीनी में 32 ग्लाईसेमिक इन्डेक्स है तो फिर यह डायबिटीज के लिए उपयुक्त है। 40 के नीचे का ग्लाईसेमिक इंडेक्स अगर होता है तो वह डायबिटीज के लिए उपयुक्त है।

नीरा पेय के विशेषताएं क्या हैं?

नारियल पेड़ के फूलों के गुच्छे से जो रस निकलता है वही नीरा है। इसमें अल्कोहल की मात्रा बिल्कुल नहीं होती व यह अत्यंत पौष्टिक और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इस नीरा का ग्लाइसिमिक इंडैक्स मात्र 32 है, इससे रक्त में शर्करा के स्तर पर इस का असर बहुत कम होता है। वहीं गन्ने के रस में यह ग्लाइसिमिक इंडैक्स 65 प्रतिशत होता है।

पहले केरल के नारियल केन्द्र में नीरा पेय से चीनी बनाई है। इसी इस्तेमाल को सफलतापूर्वक रत्नागिरी के भाटे नारियल केन्द्र में किया गया। शोधकर्ताओं की मानें तो डायबिटीज के रोगी के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है यह नीरा पेय से बनी चीनी। जल्द ही इसके पेटेंट के प्रस्ताव के लिए कोंकण कृषि विश्वविद्यालय के पास भेजा जाएगा।