प्रतिरक्षा : धूप में बैक्टीरिया व वायरस होते हैं समाप्त

प्रतिरक्षा : धूप में बैक्टीरिया व वायरस होते हैं समाप्त

मकर संक्रांति के त्योहार का एक रंग यह भी है कि मद्धम होती सर्दी के बीच खिली धूप में पतंगबाजी. मान्यता है कि पतंगबाजी के दौरान हम दिनभर में धूप में समय बिताते हैं. इससे शरीर मजबूत होता है व सक्रिय थी. विज्ञान कहता है, सर्दियों में धूप के जरिये मिलने वाला विटामिन-डी सारे वर्ष का कोटा पूरा करता है. पतंगबाजी के बहाने शरीर सक्रिय होता है, हड्डियों व ऊतकों की रिपयेरिंग होती है.

इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के शोध आंकड़ों एवं आईसीएमआर के शोधों के अनुसार, लगभग 70 फीसदी भारतीय विटामिन डी की कमी के शिकार हैं, जिनमें बच्चे एवं बड़े दोनों ही शामिल हैं. गुजरात व राजस्थान जैसे राज्यों में एक सप्ताह तक पतंगबाजी करके मकर संक्रांति को सेलिब्रेट करते हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, सूर्य की किरणों से विटामिन-डी लेने का ठीक समय होता है सर्दी का प्रभाव घटने लगता है व वसंत ऋतु की आरंभ होती है. इस दौरान संक्रांति के तिल के लड्डु खाने का रिवाज है. 100 ग्राम तिल में करीब 975 मिग्रा कैल्शियम पाया जाता है जो विटामिन-डी के साथ अवशोषित होकर हड्डियों को मजबूत बनाता है. फिजिशियन व बाल राेग एवं एलर्जी विशेष डॉ अव्यक्त अग्रवाल कहते हैं, सूर्य से दूरी यानी बीमारी. हिंदुस्तान सहित कई संस्कृतियों में सूर्य को देवता बोला गया है.

मॉडर्न मेडिसिन के सर्वाधिक प्रतिष्ठित जर्नल लैंसेट में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि सूरज के प्रकाश से बरसों तक खुद को दूर रखने वाले लोगों की मौत जल्दी होती है. लोग आज घरों, कारों में दिन का 90 फीसदी से अधिक भाग गुजार देते हैं. सूर्य से सीधे संपर्क न हो पाने के कई कारण कई शारीरिक व मानसिक दिक्कतें बढ़ रही हैं. जानिए कैसे प्रतिदिन कुछ समय धूप में बिताकर स्वस्थ रह सकते हैं


विटामिन-डी का निर्माण

सूरज की किरणें स्कीन पर पड़ने से विटामिन डी कानिर्माण होता है.विटामिन डी कई शारीरिक प्रक्रियाओं के संचालन में बेहद आवश्यक हॉर्मोन है. यह बच्चों की हड्डियों और दांतों के विकास व उनकी मजबूती के अलावा वयस्कों में हड्डियों, जोड़ों के क्षरण से सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है. इसकी कमी से एलर्जी, अवसाद, हाथ-पैर में दर्द, थकावट, भूलने की बीमारी, अनिद्रा, हार्ट अटैक, कैंसर इत्यादि का भी सम्बंध है.

मानसिक स्वास्थ्य : अवसाद व अनिद्रा दूर होती है

यूरोप इत्यादि में अवसाद के बहुत से मरीज़ होने का एक मुख्य कारण वर्ष के कुछ महीनों तक सूरज की लाइट का कम मिलना है. यह स्थिति तब है जबकि वहां नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक स्थिति हिंदुस्तान से कहीं बेहतर है. दरअसल, सूर्य की किरणें सेरोटोनिन एवं मेलाटोनिन नाम के दो जरूरी रसायनों के स्राव में मददगार होती हैं. इन रसायनों की कमी से अवसाद एवं अनिद्रा की समस्या हो सकती है. अनिद्रा के मरीजों के तो इलाज का भाग है प्रातः काल के समय सूर्य की लाइट में एक घंटा बिताना.

प्रतिरक्षा : धूप में बैक्टीरिया व वायरस समाप्त होते हैं

सूर्य की लाइट प्राकृतिक ऑटोक्लेव (कीटाणुनाशक प्रक्रिया) भी है. धूप के संपर्क में आकर न सिर्फ बहुत से हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस ख़त्म होते हैं, बल्कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी इजाफ़ा होता है. मेलाटोनिन हॉर्मोन स्कीन को सूर्य की पराबैंगनी किरणों से नुकसान से बचाता है. इसलिए धूप के अधिक संपर्क में रहने पर यह अधिक बनता है. साथ ही यह बॉडी की सर्काडियन रिम को नियंत्रित रख मीठी नींद, इम्युनिटी को बढ़ाता है.

स्वस्थ त्वचा: एक्जीमा औरस्किन कैंसर मेलानोमा का खतरा घटताहै

कुछ स्कीन रोग जैसे एक्जीमा, सोरायसिस में डर्मेटोलॉजिस्ट भी कुछ देर धूप में रहने की सलाह देते हैं. स्किन कैंसर मेलानोमा के होने की संभावना भी सूर्य की लाइट से कम होती है. स्किन टीबी के मामलों में भी दवाओं के अलावा सूर्य किरणों से इलाज किया जाता रहा है.

बहरहाल, तेज धूप में देर तक बैठने या समुद्र किनारे तेज धूप में बैठने से स्कीन में सन बर्न के लक्षण उबर सकते हैं एवं लगातार तेज धूप में रहने से स्किन कैंसर की संभावना भी बढ़ती है. ऐसे में सनस्क्रीन के प्रयोग से दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है. खासकर समुद्र किनारे जाने पर या समुद्री इलाकों में पर्यटन के समय ध्यान रखना अधिक आवश्यक है, क्योंकि पानी से परावर्तित होकर ये किरणें दोगुना असर डालती हैं.

दिमागी स्वास्थ्य : अल्जाइमर्स जैसी बीमारी में लाभकारी हल्की धूप

मल्टीप्लस्क्लेरोसिस एवं भूलने की बीमारी अल्जाइमर्स जैसे गंभीर मस्तिष्क रोगों के इलाज में भी सूर्य किरणों का फायदेमंद असर पड़ता है.

आंखों का स्वास्थ्य : हल्की धूप फायदेमंद

इसके लिए भी सूर्य की लाइट मददगार है, किंतु ध्यान रहे कि सूर्य की तरफ़ सीधे देखना आंखों के लिए नुक़सानदेह होने कि सम्भावना है.

कैंसर से सुरक्षा : धूप कीकमी से कैंसर का खतरा

सूर्य की किरणें कई प्रकार के कैंसर जैसे हॉजकिंस लिम्फोमा, कोलोन कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर आदि से बचाव का एक माध्यम हैं. अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन के शोध के अनुसार लंबे समय तक विटामिन डी की कमी (यानी धूप से दूरी) कैंसर की संभावना बढ़ाती है.

मजबूत शरीर: हड्डियों और जोड़ों की बेहतरी

रुमेटाइड आर्थराइटिस जैसी जोड़ों के दर्द से सम्बंधित बीमारियों एवं दमा के दौरे भी सूर्य की लाइट से कम होते हैं.

तनाव में कमी : खुशी से भर देती है धूप

जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मेटोलॉजी (2003) के अनुसार, सूर्य की किरणें हैप्पी हॉर्मोन एंडोर्फिन के स्राव में भी उत्प्रेरक होती हैं. यही वजह है कि बादलों वाले दिन लम्बे चलें तो मनोदशा ख़राब होने लगती है व लम्बी बदली के बाद धूप का खिलना हमें ख़ुशी से भर देता है.